Search

हजारीबाग में अडानी के कोल ब्लॉक की पर्यावरण स्वीकृति पर आपत्ति

  • केंद्र-राज्य के अधिकारियों को ज्ञापन के बावजूद 20 जनवरी को हुई जनसुनवाई, हंगामा और मारपीट

Hazaribagh: हजारीबाग जिला में अडानी समूह की प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति देने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. तय समय-सीमा के भीतर केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों और अधिकारियों को लिखित आपत्ति (ज्ञापन) सौंपे जाने के बावजूद 20 जनवरी 2026 को जनसुनवाई आयोजित कर दी गई. आरोप है कि आपत्तियों का निराकरण किए बिना ही कंपनी प्रशासन के साथ मिल कर जनसुनवाई की सारी तैयारियां पूरी कर लीं.


आपत्ति दर्ज कराने प्रभावित ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की थी कि जब तक सभी आपत्तियों का विधिवत निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया को स्थगित रखा जाए, लेकिन इसके विपरीत 20 जनवरी 2026 को धेंगा के ओपन ग्राउंड में जनसुनवाई आयोजित की गई.

 

जनसुनवाई के दिन बना अराजक माहौल


जनसुनवाई के दिन धेंगा ओपन ग्राउंड में स्थिति पूरी तरह अराजक हो गई. स्थानीय लोगों के अनुसार जनसुनवाई के दौरान हंगामा, धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाएं भी सामने आईं. कई ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया और माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण बनाया गया.

 

नियम विरुद्ध और अपारदर्शी प्रक्रिया का आरोप


परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पहले ही अपनी आपत्ति में स्पष्ट किया था कि प्रस्तावित जनसुनवाई की प्रक्रिया पर्यावरणीय नियमों के विरुद्ध, अपारदर्शी और प्रभावित लोगों के हितों के खिलाफ है. इसके बावजूद प्रशासन द्वारा जनसुनवाई आयोजित करना कानूनी प्रावधानों की अनदेखी माना जा रहा है.


इन अधिकारियों को भेजा गया था आपत्ति पत्र


आपत्ति दर्ज कराते हुए निम्नलिखित अधिकारियों एवं संस्थानों को ज्ञापन भेजा गया था 


-सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार
-अपर सचिव/सदस्य सचिव, पर्यावरण मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA), झारखंड
-क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय, रांची
-सदस्य सचिव, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रांची
-उपायुक्त, हजारीबाग जिला प्रशासन
-अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), हजारीबाग
-प्रभागीय वन पदाधिकारी (DFO), हजारीबाग वन प्रमंडल
-पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग
-अंचल अधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, संबंधित प्रखंड

 

जनसुनवाई स्थल पर गंभीर सवाल


आपत्ति पत्र में कहा गया था कि जनसुनवाई स्थल परियोजना क्षेत्र से लगभग 14 किलोमीटर दूर निर्धारित किया गया है, जो पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचनाओं (14 सितंबर 2006 और संशोधित 1 दिसंबर 2009) की भावना के खिलाफ है. इससे वास्तविक प्रभावित गांवों के लोगों की भागीदारी बाधित हुई.

 

ग्रामसभा की सहमति नहीं लेने का आरोप


आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि परियोजना क्षेत्र पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, इसके बावजूद ग्रामसभाओं से स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति (FPIC) नहीं ली गई. इसे संविधान, पेसा कानून और वनाधिकार कानून का उल्लंघन बताया गया है. साथ ही परियोजना को पर्यावरण और आजीविका पर गंभीर खतरा बताया गया.


आपत्ति में यह भी स्पष्ट किया गया था कि सभी प्रभावित गांवों में पारदर्शी तरीके से जनसुनवाई नहीं कराई गई, न ही पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र आकलन किया गया और न ही ग्रामसभा की विधिवत सहमति ली गई.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp