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मनरेगा दिवस पर रांची में मजदूर महापंचायत, VB-GRAMG के खिलाफ गरजे मजदूर

20वें मनरेगा दिवस के अवसर पर रांची के नामकुम में सोमवार को सैकड़ों मनरेगा मजदूरों, कार्यकर्ताओं और ग्रामीण परिवारों ने मजदूर महापंचायत और रैली का आयोजन किया.
 

Ranchi:  20वें मनरेगा दिवस के अवसर पर रांची के नामकुम में सोमवार को सैकड़ों मनरेगा मजदूरों, कार्यकर्ताओं और ग्रामीण परिवारों ने मजदूर महापंचायत और रैली का आयोजन किया.यह कार्यक्रम MGNREGA बचाओ मोर्चा और NREGA वॉच के संयुक्त बैनर तले आयोजित हुआ, जिसमें राज्य के विभिन्न किसान-मजदूर संगठनों ने भाग लिया. 

 

महापंचायत में एक स्वर में VB-GRAMG का विरोध किया गया और मनरेगा की पूर्ण बहाली की मांग उठाई गई.दोपहर 1 बजे नामकुम चौक से मजदूरों ने रैली निकालकर पुराना प्रखंड परिसर तक मार्च किया, जहां शाम 4 बजे तक मजदूर महापंचायत चली.इसमें सिमडेगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गुमला और रांची से आए सैकड़ों मजदूर और ग्रामीण परिवार शामिल हुए. महापंचायत का संचालन अफ़जल अनीस ने किया.

 

झारखंड नरेगा वॉच के संयोजक जेम्स हेरेंज ने कहा कि 2005 में लंबे जनसंघर्षों के बाद संसद ने मनरेगा कानून पारित किया, जिसे 2 फरवरी 2006 को लागू किया गया. इस कानून ने ग्रामीण भारत को काम का अधिकार, महिलाओं को रोजगार और समान मजदूरी दी. उन्होंने VB-GRAMG की खामियों को सामने रखते हुए इसे मजदूर-विरोधी बताया.

 

सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि मनरेगा के लिए लोगों ने जेल तक जाना स्वीकार किया था, जिसके बाद कुआं, बागवानी और रोजगार मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है.

 

सभा में वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि संविधान से मिले काम के अधिकार की गारंटी है. झारखंड जनाधिकार महासभा के सिराज ने कहा कि मनरेगा एक सार्वभौमिक और मांग-आधारित कानून था, लेकिन अब केंद्र सरकार गांवों में काम तय कर रही है, जिससे योजना कमजोर हो रही है.

 

महापंचायत में मजदूरों ने बताया कि मनरेगा से बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आजीविका और पलायन रोकने में मदद मिली. वक्ताओं ने 60:40 नियम, लंबित मजदूरी भुगतान में देरी और बढ़ते भ्रष्टाचार पर चिंता जताई.

 

सभा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, बलराम, सीटू के शिव कुमार राय सहित कई नेताओं और मजदूर प्रतिनिधियों ने संबोधित किया. अंत में VB-GRAMG के विरोध और मनरेगा बहाली का प्रस्ताव पारित किया गया. राष्ट्रपति के नाम प्रस्ताव भेजने और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को हस्ताक्षर अभियान सौंपने का निर्णय लिया गया. महापंचायत में यह संकल्प लिया गया कि मनरेगा की पूर्ण बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा.

 

 

 


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