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तेतुलिया लैंड स्कैम : वन विभाग ने HC में दाखिल किया जवाब, आरोपियों की अंतरिम राहत बरकरार

बोकारो के चास प्रखंड के तेतुलिया गांव में 103 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा मामले में दो आरोपियों की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान वन विभाग की ओर से इस मामले में कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया गया, जिस पर प्रति उत्तर के लिए याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट से समय की मांग की गई.
 

Ranchi :  बोकारो के चास प्रखंड के तेतुलिया गांव में 103 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा मामले में दो आरोपियों की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान वन विभाग की ओर से इस मामले में कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया गया, जिस पर प्रति उत्तर के लिए याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट से समय की मांग की गई.

 

सीआईडी की ओर से पूर्व में ही जवाब दाखिल किया जा चुका है. इस मामले में शैलेश कुमार सिंह और विमल कुमार अग्रवाल की ओर से अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की कोर्ट ने प्रार्थियों के खिलाफ अंतरिम राहत बरकरार रखी है.

 

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तिथि निर्धारित की है. राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार ने पक्ष रखा. 

 

वन भूमि की फर्जी तरीके से की गई जमाबंदी

बता दें कि जमीन पर अवैध कब्जा करने के मामले में सीआईडी की ओर से कांड संख्या 4/2025 दर्ज किया गया है. आरोप है कि उक्त जमीन की 2012 में गलत तरीके से जमाबंदी की गई थी. जमाबंदी करने वाले तत्कालीन अंचल अधिकारी को सरकार ने बर्खास्त किया गया था.

 

इस काम में सहयोगी रहे एसडीओ, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अंचल निरीक्षक, राजस्व कर्मचारी और अमीन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं. 

 

बताया जाता है कि सरकार ने बोकारो इस्पात संयत्र को सतनपुर व तेतुलिया की पहाड़ और वन भूमि दी थी. लेकिन उक्त भूमि का बीएसएल ने उपयोग नहीं किया, इसके कारण यह जमीन खाली पड़ी है. वर्ष 1980 और 2013 में रिवीजनल सर्वे प्रकाशित हुआ था. लेकिन इन 33 वर्षों में किसी व्यक्ति ने इस जमीन पर दावा-आपत्ति नहीं किया. 

 

इसके बाद बीएसएल ने इस जमीन को वन विभाग को लौटा दिया था. लेकिन वर्ष 2012 में तत्कालीन अंचल अधिकारी द्वारा फर्जी कागजात के आधार पर 103 एकड़ जमीन की जमाबंदी कर दी. फर्जीवाड़ा का मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने जांच के बाद सीओ को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था. 

 

 

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