बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस माधव जामदार ने एक मामले की सुनवाई के दौरान जो कहा, वह देश के लोकतंत्र, ब्यूरोक्रेसी की सच्चाई को उजागर करता है. उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है. वे विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं. अगर लोग विरोध करें, तो आप केस दर्ज कर देंगे... यह क्या है? विरोध करना नागरिकों का अधिकार है.
इसे भी पढ़ें...
याचिकाकर्ता ने सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद', 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए हैं... नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर के आदेश क्यों? परसों एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में चर्चा क्या हो रही थी- पीठासीन अधिकारी कैसे चुना जाता है और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे चला गया...यह क्या है? पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है," "पाला बदलने पर विचार करें, वहां वॉशिंग मशीन है."
बॉम्बे हाई कोर्ट की यह टिप्पणी क्या बताती है. यही कि देश में घोषित रूप से ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें लोग डर कर रहे. सवाल नहीं पूछ सकते, विरोध नहीं कर सकते, केस कर दिया जायेगा, झूठे मामले तैयार किये जायेंगे, बदनाम किया जायेगा, पार्टी को तोड़ दिया जायेगा, इंसान के तौर पर आपको तोड़ा जायेगा और सलाखों के पीछे ढ़केल दिया जायेगा. सिस्टम सूचनाओं को छुपायेगा, हर काम के लिए वसूली करेगा, बस सवाल उठा कर देखिये, पलाकर रखे गये सुपारी किलर को आपके पीछे छोड़ दिया जायेगा.
आज का सच यही है कि आप नागरिक नहीं हैं. साबित करना होगा. कोई भी दस्तावेज जो आपके हाथ में है, वो मान्य नहीं है. पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर देश के लोगों की गाड़ियों पर प्रयोग किया जा रहा है. लेकिन आपको चुप रहना होगा. लाइन में लगे रहिये. विरोध करेंगे, तो फंसा दिया जायेगा. हर तरफ डर का माहौल है. सब पर अज्ञात का पहरा है. आपने जिनको चुना है, वह सुनेंगे नहीं. वो किनके फायदे के लिए काम कर रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है. फिर भी हम कहेंगे संविधान है, कानून है और हम सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें



Leave a Comment