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विपक्ष का बिहार एसआईआर को लेकर प्रदर्शन जारी, भाजपा ने कहा, वे घुसपैठियों को वोटर बनाना चाहते हैं

विपक्षी दलों के नेताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाये. रविशंकर प्रसाद ने पूछा कि  क्या वे चाहते हैं कि रोहिंग्या और अवैध घुसपैठिये मतदाता बनें?   मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें?
 

New Delhi :  इंडिया अलायंस के सांसद बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनीव आयोग पर हमला जारी रखे हुए हैं. उधर राहुल गांधी इसे लेकर बिहार में वोटर यात्रा निकाल कर आयोग और मोदी सरकार पर हल्ला बोल रहे हैं.

 

 

 

 

 

विपक्षी दलों के नेताओं ने आज मंगलवार को भी  निर्वाचन आयोग के खिलाफ संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाये.  प्रदर्शनकारी सांसद अपने हाथों में बैनर लिये हुए थे.

 

बैनरों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमॉर, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की तस्वीर लगी हुई थी. बैनरों में वोट चोर  लिखा हुआ था.  संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने किया. प्रदर्शन में अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी सहित अन्य सांसद शामिल हुए.

 


मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर संसद में अपने विरोध प्रदर्शन का  वीडियो डाला.  उन्होंने लिखा, निर्वाचन आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता.

 

खड़गे ने  कहा, इंडिया गठबंधन ने सबूतों के साथ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों पर गंभीर सवाल उठाये हैं, जिनका जवाब निर्वाचन आयोग को विपक्ष को डराकर नहीं, बल्कि जांच करके देना चाहिए. 

 

इंडिया अलायंस के विरोध-प्रदर्शन को लेकर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, विपक्ष क्या चाहता है? वे संसद का मज़ाक उड़ा रहे है.  उन्हें सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली और अब वे बेवजह हंगामा कर रहे हैं.रविशंकर प्रसाद ने पूछा कि क्या वे चाहते हैं कि रोहिंग्या और अवैध घुसपैठिये मतदाता बनें?   मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें?   

 

भाजपा सांसद ने कहा कि मैं राहुल गांधी से कुछ कहना चाहता हूं.  जब पेगासस का मुद्दा उठा था, तो सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल फ़ोन जमा करने का आदेश दिया था.  उन्होंने अपनी बात रखी ही नहीं और बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से माफ़ी मांगनी पड़ी

 

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