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दिल्ली में होने वाले जनजाति समागम को लेकर बढ़ा विरोध, झारखंड के 133 लोगों ने जारी किया संयुक्त बयान

Ranchi: झारखंड के 133 प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं, जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने 24 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले जनजाति सांस्कृतिक समागम के बहिष्कार की अपील की है. संयुक्त बयान जारी कर इन लोगों ने कार्यक्रम के आयोजक जनजाति सुरक्षा मंच की विचारधारा को आदिवासी विरोधी बताया है.

 

जारी बयान में कहा गया है कि जनजाति सांस्कृतिक समागम का उद्देश्य आदिवासियों की स्वतंत्र पहचान और अस्तित्व को खत्म करना है. अपीलकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जनजाति सुरक्षा मंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़ा संगठन है. उनका कहना है कि ये संगठन आदिवासियों को अलग समुदाय के रूप में नहीं बल्कि हिन्दू सवर्ण व्यवस्था का हिस्सा मानते हैं. इसी वजह से वे आदिवासी शब्द का इस्तेमाल नहीं करते और जनजाति और वनवासी शब्दों का प्रयोग करते हैं.

 

बयान में कहा गया है कि ये संगठन सरना-सनातन एक हैं जैसे नारों के जरिए आदिवासियों की अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही ईसाई आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति सूची से हटाने यानी डी-लिस्टिंग की मांग कर आदिवासी समाज की एकता को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

 

अपीलकर्ताओं ने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच और इससे जुड़े संगठन सरना कोड की मांग के विरोधी हैं. उनका आरोप है कि ये संगठन कभी भी आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के संघर्ष में साथ नहीं खड़े हुए. बयान में कहा गया है कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा के माध्यम से आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्र पहचान को कमजोर करने की कोशिश हो रही है.

 

जारी बयान में कहा गया है कि आरएसएस का उद्देश्य देश को हिन्दू राष्ट्र बनाना है, जहां सवर्ण हिन्दुओं को प्रथम दर्जे का नागरिक बनाया जाए और बाकी समुदायों को दूसरे दर्जे का दर्जा मिले. अपीलकर्ताओं का कहना है कि इसी राजनीतिक सोच के तहत आदिवासियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

 

संयुक्त अपील पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा, देवकीनंदन बेदिया, कुमार चंद्र मार्डी, गुंजल इकिर मुंडा, डेमका सोय, रमेश जराई, रजनी मुर्मू, नीतिशा खलखो, अलोका कुजूर, कृष्णा मार्डी, बिंसाय मुंडा, प्रबल महतो, मिनाक्षी मुंडा, मुकेश बिरुआ, हरी कुमार भगत, दिनेश मुर्मू, सानिका मुंडा, ज्योत्सना तिर्की, साधु हो, सुनीता लकड़ा और जयकिशन गोडसोरा समेत कई प्रमुख लोग शामिल हैं.

 

इसके अलावा अखिल भारतीय आदिवासी विकास समिति, गांव गणराज्य परिषद, सरना संगोम समिति, आदिवासी मुंडा समाज महासंघ, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी मूलवासी अधिकार मंच, भारत जकत माझी परगना महल रामगढ़, पारंपरिक ग्राम सभा खूंटी, आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद, संयुक्त ग्राम सभा, युवा झुमुर, आदिवासी पाहन बाबा सेवा समिति, हो लेखक संघ, आदिवासी समन्वय समिति, ग्राम प्रधान संघ, झारखंड जनाधिकार महासभा, जोहार और ओमोन महिला संगठन समेत कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बयान का समर्थन किया है.

 

अपील में झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों से 24 मई को आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम और उसके आयोजक जनजाति सुरक्षा मंच का पूर्ण बहिष्कार करने की मांग की गई है. साथ ही लोगों से सभा, चर्चा और अन्य जन कार्यक्रम आयोजित कर विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया गया है.

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