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झारखंड में सरकारी ब्लड बैंक निजी हाथों में देने के फैसले का विरोध, रद्द करने की मांग

Ranchi : झारखंड में सरकारी ब्लड बैंक को निजी एजेंसियों को सौंपने के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है. झारखंड राज्य स्वैच्छिक रक्तदान संगठन कॉर्डिनेशन कमेटी ने इसे जनविरोधी बताते हुए सरकार से आदेश रद्द करने की मांग की है.

 

इस मुद्दे पर राज्यभर के रक्तदान संगठनों और रक्तवीरों की एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता कोल्हान प्रभारी और कुड़मी संस्कृति कल्याण समिति के संस्थापक सपन कुमार महतो ने की. बैठक में राज्य के कई जिलों के प्रतिनिधि और थैलेसीमिया तथा सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित मरीजों के परिजन भी शामिल हुए.

 

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकारी ब्लड बैंक को निजी या कॉरपोरेट संस्थाओं को देना सरकार की जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है. इससे स्वास्थ्य व्यवस्था में अव्यवस्था और मुनाफाखोरी बढ़ने का खतरा है. उन्होंने इसे रक्तदान जैसे मानवीय कार्य का अपमान बताया.

 

संगठनों ने आरोप लगाया कि इस तरह का फैसला गरीब और जरूरतमंद मरीजों के हितों के खिलाफ है. सरकार से अपील की गई कि प्रस्तावित टेंडर और आदेश को तुरंत रद्द किया जाए.

 

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पूरे झारखंड में विभिन्न सामाजिक, स्वास्थ्य, मानवाधिकार और राजनीतिक संगठनों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी. जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी किया जाएगा.

 

बैठक में नदीम खान, सपन कुमार महतो, हर्षवर्धन, विवेकानंद वर्मा, पॉवेल कुमार, विनय, हंसराज, चंदन सिंह, शाहनवाज अब्बास, खुबैद शाहिद, असफर खान, अकरम राशिद, अखिलेश समेत कई लोग शामिल हुए. थैलेसीमिया पीड़ितों के परिजनों में ललिता कुमारी, विक्रम दास और रामकृष्ण भी मौजूद थे.

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