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रांची सहित 29 ट्रेजरी से पेंशनरों के लेनदेन के 344 मामले में 11 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान

  • - 31.26 प्रतिशत मामलों में पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) नहीं पाया गया.
  • - 11.89 लाख मामलों में 1.29 लाख को नमूना जांच के लिए चुना गया.

Ranchi: झारखंड के महालेखाकार की जांच मे पेंशनरों के साथ किये गये 344 लेन-देन (Transaction) के मामलों में 11 करोड़ रुपये के अधिक भुगतान का मामला पाया गया है. सिर्फ 12 पेंशनरों को 1.14 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करने का मामला पकड़ में आया. कुछ पेंशनरों को ग्रेच्युटी मद में निर्धारित सीमा से अधिक का भुगतान किया गया है. ट्रेजरी से भुगतान के आंकड़ों के मिलान में 31.26 प्रतिशत मामलों में पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) नहीं पाया गया.

 

महालेखाकार ने वित्त विभाग के Integtared Financial Management System (IFMS) के डाटा बेस से पेंशनरों के साथ किये गये लेन-देन के 11.89 लाख मामलों में से सिर्फ 1.29 लाख को नमूना जांच के लिए चुना. इसमें 74,178 पेंशनरों के ग्रेच्युटी भुगातन से जुड़े 86,014 लेन-देन और 30,305 पेंशनरों के CPV के भुगतान के लिए किये गये 43,158 लेन-देन शामिल है. 

 

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महालेखाकार ने नमूना जांच के दौरान पाया कि पेंशनरों के साथ किये गये 344 लेन-देन में उन्हें 11 करोड़ रुपये का अधिक का भुगतान किया गया है. 11 करोड़ रुपये के अधिक भुगतान से जुड़े कुल 344 मामलों में ग्रेच्युटी के 184 और कम्यूटेड पेंशन के 160 मामले शामिल हैं. 

 

ग्रेच्युटी भुगतान के 184 में से छह मामले रांची, बोकारो, चक्रधरपुर, सिमडेगा और जमशेदपुर ट्रेजरी से संबंधित. इसमें पेंशनरों को ग्रेच्युटी मद में 20 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया. जबकि राज्य सरकार ने ग्रेच्युटी मद में भुगातन की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये निर्धारित कर रखी है. 

 

जांच में पाया गया कि बोकारो, दुमका, जमशेदपुर, लोहरदगा, पलामू और रांची ट्रेजरी से ग्रेच्युटी और कम्यूटेड पेंशन वैल्यू मद में 1.14 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान किया गया.

 

महालेखाकार ने वित्त विभाग के Integtared Financial Management System (IFMS) के विश्लेषण में पाया है कि ट्रेजरी में पेंशनरों से संबंधित डाटा दो टेबल में रखा जाता है. एक टेबल में महालेखाकार द्वारा स्वीकृत ब्योरा रहता है. इसमें ग्रेच्यूटी (DCRG), कम्यूटेड वैल्यू ऑफ पेंशन (CVP), पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO), पेंशनर का नाम और राशि का ब्योरा रहता है. इसी ब्योरे के आलोक में ट्रेजरी द्वारा पेंशनर को भुगतान किया जाता है. दूसरे टेबल में पेंशनर का नाम, PPO, भुगतान की गयी राशि, ट्रेजरी वाउचर नंबर (TV) और ट्रेजरी वाउचर का डेट रहता है.

 

महालेखाकार ने पेंशनरों के साथ किये गये 11.89 लाख लेन-देन के मामलों ट्रेजरी में रखे गये दोनो टेबल के डाटा का मिलान किया गया. इसमें ट्रेजरी के दूसरे टेबल में 3.71 लाख लेन-देन में PPO नहीं पाया गया. 11.89 लाख लेन-देन के मामलों में सिर्फ 8.18 लाख मामलों में दूसरे टेबल में PPO पाया गया. इन 8.18 लाख मामलों में 0.68 लाख मामले ग्रेच्युटी, 0.43 लाख मामले कम्यूटेड पेंशन के और 6.88 लाख मामले पेंशन भुगतान से संबंधित है. यानी सिर्फ 68.74 प्रतिशत मामलों में PPO दर्ज हो रहा है और 31.26 प्रतिशत लेन-देन के मामलों में PPO दर्ज नहीं हो रहा है. जांच के दायरे में शामिल किये गये लेन-देन के सभी मामलों का संबंध राज्य के 29 ट्रेजरी से है.

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