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Pakur News : पत्थर खनन घोटाले का खुलासा, फर्जी दस्तावेजों के सहारे ली पर्यावरण मंजूरी, 13 पर FIR

Pakur :  जिले में पत्थर खनन से जुड़े एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए खदानों से संबंधित दस्तावेजों में सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ की गई और वास्तविक तथ्यों को छिपाकर सरकारी नियमों को दरकिनार किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

 

यह मामला तब सामने आया, जब वित्तीय वर्ष 2022-23 की ऑडिट के दौरान महालेखाकार (एजी) कार्यालय ने खनन विभाग के रिकॉर्ड की जांच की. जांच में जिला खनन कार्यालय द्वारा जारी मूलरिपोर्ट और परिवेश पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों के बीच भारी अंतर पाया गया. इसके बाद शुरू हुई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए.

 

जांच अधिकारियों के अनुसार, पर्यावरण मंजूरी हासिल करने के लिए खदानों के आसपास के कुल रकबे को वास्तविक क्षेत्रफल से काफी कम दर्शाया गया. जबकि पर्यावरणीय स्वीकृति देने में कुल क्षेत्रफल सबसे महत्वपूर्ण मानकों में शामिल होता है.

 

आरोप है कि जानबूझकर रिकॉर्ड में बदलाव कर कम रकबा दिखाया गया और उसी आधार पर मंजूरी हासिल कर करोड़ों रुपये के खनन कारोबार का रास्ता साफ किया गया.

 

सूत्रों का कहना है कि मूल रिपोर्ट में मौजूद आंकड़ों को बदलकर परिवर्तित दस्तावेज परिवेश पोर्टल पर अपलोड किए गए. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त की गई. बाद में जब मूल अभिलेख और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान हुआ तो पूरे खेल का खुलासा हो गया.

 

मामले के उजागर होने के बाद संबंधित पर्यावरणीय स्वीकृतियां वापस ले ली गईं और कई खनन पट्टों को भी रद्द कर दिया गया. इस घटनाक्रम ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

 

जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार के आवेदन पर नगर थाना में कांड संख्या 123/2026 दर्ज किया गया है. प्राथमिकी में नौ पूर्व खनन पट्टाधारियों और चार नए आवेदकों समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इनमें पाकुड़ और पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले से जुड़े कई कारोबारी शामिल हैं.

 

पुलिस और खनन विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि दस्तावेजों में हेरफेर का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था, फर्जी रिपोर्ट किसने तैयार की और किन अधिकारियों व अन्य लोगों की भूमिका इस पूरे खेल में रही. डिजिटल रिकॉर्ड, विभागीय फाइलों और पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों की गहन जांच जारी है.

 

खनन क्षेत्र से जुड़े इस कथित फर्जीवाड़े को जिले के हाल के वर्षों के सबसे बड़े पर्यावरण एवं खनन घोटालों में से एक माना जा रहा है. जांच आगे बढ़ने के साथ कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है.

 

 

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