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पलामूः मेदिनीनगर नगर निगम की नई टीम के सामने चुनौतियों का पहाड़

Medininagar : मेदिनीनगर नगर निगम की नई टीम के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है. मेयर पद पर अरुणा शंकर व डिप्टी मेयर पद पर मनोज सिंह के आसीन होने के साथ ही शहरवासियों की उनसे उम्मीदों का नया दौर शुरू हो गया है. शहर की बढ़ती आबादी, विस्तारित निगम क्षेत्र और बुनियादी सुविधाओं की कमी नई टीम के लिए बड़ी चुनौतियां हैं. हालांकि, अरुणा शंकर दोबारा जीतकर मेयर बनी हैं, जबकि मनोज सिंह पूर्व में नगर पालिका उपाध्यक्ष रह चुके हैं. दोनों के पास काम करने का अनुभव है.

 

 

मेदिनीनगर नगर निगम की आबादी करीब ढाई से तीन लाख के बीच आंकी जाती है. निगम क्षेत्र में कुल 35 वार्ड हैं. बीते कुछ वर्षों में कई नए मोहल्लों को निगम में जोड़ा गया, लेकिन वहां अब भी सड़क, नाली व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं.

 

ड्राई जोन में पेयजल संकट से निबटना बड़ी चुनौती


शहर के आबादगंज, हमीदगंज, बैरिया, निमिया, सुदना जैसे इलाके ड्राई जोन में आते हैं. गर्मी के दिनों में यहां पानी की किल्लत विकराल रूप ले लेती है. कई जगहों पर लोगों को टैंकर या चापाकलों पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसे में इन इलाकों में पेयजल व्यवस्था सुधारना निगम के लिए बड़ी चुनौती है.

 

लंबित विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना 

 

विकास कार्यों की बात करें, तो स्थायी बस अड्डा, नई सड़कों और नालियों का निर्माण तथा कोयल नदी पर प्रस्तावित रबर डैम जैसे प्रोजेक्ट लंबे समय से लंबित हैं. शहरवासियों को उम्मीद है कि इस बार ये योजनाएं फाइलों से निकलकर धरातल पर उतरेंगी.

 

सीमित सफाई कर्मी, व्यवस्था पर असर

 

शहर में सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. निगम में कुल 299 सफाई कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें मात्र 16 स्थायी हैं, जबकि 148 अनुबंध, 44 दैनिक और 75 मास्टर रोल कर्मी हैं. इसके अलावा 16 कर्मी डोर-टू-डोर कचरा उठाव में लगे हैं. कर्मियों की यह संख्या शहर की आबादी के अनुपात में काफी कम है. इसके चलते कई वार्डों में नियमित सफाई नहीं हो पाती.

 

निगम के वाहनों का रखरखाव बड़ी समस्या

 

निगम के पास वाहन तो पर्याप्त हैं, लेकिन रखरखाव की कमी के कारण कई वाहन खराब पड़े हैं. निगम के पास एक सुपर सकर मशीन, तीन जेसीबी, दो हाइवा, दो हाइवा टैंकर व एक पुराना हाइवा है. इसके अलावा दो ट्रैक्टर लोडर, 14 ट्रैक्टर, 15 नए टीपर व 65 पुराने टीपर हैं, जिनमें से छह खराब बताए जा रहे हैं.निगम के पास 10 टैंकर, तीन स्काई लिफ्ट, एक मोक्ष वाहन और एक जेट मशीन भी है.


फॉगिंग के लिए पांच ऑटो वाहन और चार बाइक उपलब्ध हैं, जिनमें क्रमशः दो-दो खराब हैं. इसके अलावा दो चलंत शौचालय व दो वीआईपी चलंत शौचालय निगम के पास हैं. चापाकल मरम्मत के लिए तीन ई-रिक्शा हैं, जिनमें एक खराब है, जबकि डोर-टू-डोर कचरा उठाव के लिए 10 ई-रिक्शा में से दो खराब हैं. इसके अलावा एक डस्टबिन लोडर और एक इंफोर्समेंट वाहन भी निगम के पास उपलब्ध है.

 

प्रबंधन और मॉनिटरिंग सुधारने की जरूरत

 

निगम के लिए संसाधनों की कमी से ज्यादा उनकी देखरेख और प्रबंधन की समस्या है. यदि निगम प्रशासन समय पर मरम्मत और मॉनिटरिंग की व्यवस्था मजबूत करे तो सफाई और अन्य सेवाओं में सुधार संभव है.अब देखना होगा कि मेयर अरुण शंकर और डिप्टी मेयर मनोज सिंह के नेतृत्व में नई टीम शहर की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है और मेदिनीनगर को एक व्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधायुक्त शहर बनाने की दिशा में कितनी ठोस पहल करती है.


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