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पलामू : अमर शहीद नीलांबर-पीतांबर के फांसी स्थल व ऐतिहासिक कुएं के संरक्षण की मांग

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर नीलाम्बर और उनके भाई वीर पीताम्बर के ऐतिहासिक फांसी स्थल और समाधि स्थल (ऐतिहासिक कुआं) की बदहाल स्थिति को लेकर अब आवाज तेज हो गई है.
 

Ranchi/Palamu : 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर नीलांबर और उनके भाई वीर पीतांबर के ऐतिहासिक फांसी स्थल और समाधि स्थल (ऐतिहासिक कुआं) की बदहाल स्थिति को लेकर अब आवाज तेज हो गई है. 

 

राज्यपाल को भेजे गए आवेदन में इन स्थलों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग की गई है. इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि गढ़वा जिले के चेमू-सेनया से क्रांति का बिगुल फूंकने वाले इन दोनों भाइयों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कई मोर्चों पर संघर्ष किया. गुरिल्ला युद्ध में निपुण नीलंबर-पीतांबर को ब्रिटिश सेना लाख कोशिशों के बावजूद पकड़ नहीं पाई.

 

स्थानीय मुखबिरों की सूचना पर उन्हें एक भोज के दौरान गिरफ्तार किया गया और करीब 150 किलोमीटर दूर पलामू के लेस्लीगंज स्थित पुलिस छावनी में ले जाया गया. आरोप है कि बिना मुकदमा चलाए दोनों को पीपल के पेड़ पर फांसी दे दी गई और शव को पास के कुएं में डाल दिया गया.

 

जर्जर हालत में ऐतिहासिक कुआं 

जिस कुएं में शहीदों के शव डाले गए थे, वह आज भी मौजूद है, लेकिन उसकी स्थिति बेहद दयनीय है. करीब 3 डिसमिल जमीन पर स्थित यह स्थल अतिक्रमण की चपेट में है.

 

कुएं की मुंडेर टूटी-फूटी है, चारों ओर झाड़ियां उगी हैं और किसी प्रकार का सुरक्षा घेरा नहीं है. प्रतिनिधियों ने कहा कि यह स्थान भव्य स्मारक के रूप में विकसित होना चाहिए था, लेकिन उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है.

 

गौरवशाली इतिहास, पर उपेक्षित धरोहर

नीलांबर-पीतांबर ने पलामू को गुलामी से मुक्त रखने के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया था. उनका बलिदान झारखंड ही नहीं, देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. बावजूद इसके, उनके बलिदान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल आज संरक्षण की बाट जोह रहे हैं.

 

आवेदन में राज्यपाल से मांग की गई है कि फांसी स्थल और ऐतिहासिक कुएं को संरक्षित कर भव्य स्मारक का रूप दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन अमर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें.

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