Palamu News: पलामू जिले के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) परिसर में नवजात के शव को कुत्ते द्वारा मुंह में दबाकर घूमने के मामले में जिला प्रशासन की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं. जांच में सामने आया है कि नवजात का जन्म मेडिकल कॉलेज के बगल में स्थित एक निजी अस्पताल में हुआ था. इसके बाद दो महिलाएं नवजात के शव को झोले में लेकर अस्पताल परिसर पहुंचीं और पोस्टमार्टम हाउस के पास फेंककर चली गईं.
इसे भी पढ़ें:
मंगलवार की सुबह इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत और पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने स्वयं मेडिकल कॉलेज परिसर पहुंचकर मामले की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए.
सदर एसडीएम संजय पांडेय और प्रशिक्षु आईएएस ऋत्विक मेहता के नेतृत्व में जांच टीम ने अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज के आधार पर टीम संबंधित निजी अस्पताल तक पहुंची. इसके बाद मंगलवार की देर शाम निजी अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर दिया गया.
प्रशिक्षु आईएएस ऋत्विक मेहता के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में दो महिलाओं की गतिविधियां मंगलवार की सुबह करीब चार बजे से दिखाई दे रही हैं. दोनों महिलाएं झोले में नवजात का शव लेकर आई थीं और पोस्टमार्टम हाउस के पास फेंककर वापस लौट गईं. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नवजात का जन्म संबंधित निजी अस्पताल में हुआ था. अस्पताल में कार्यरत कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि नवजात को जन्म देने वाली लड़की नाबालिग हो सकती है. हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है. अधिकारियों ने निजता का हवाला देते हुए लड़की की पहचान सार्वजनिक नहीं करने की बात कही है. मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है.
इधर, जिला प्रशासन नवजात के शव को बरामद करने के लिए अभियान चला रहा है. हालांकि, खबर लिखे जाने तक शव बरामद नहीं किया जा सका था. पुलिस और प्रशासन की जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और शव को अस्पताल परिसर में फेंकने के पीछे क्या वजह थी.
इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. अस्पताल अधीक्षक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए पहचान पत्र जारी करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि परिसर में आने-जाने वालों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके.
फिलहाल, निजी अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर मामले की जांच जारी है. नवजात की मौत के कारणों और घटना में शामिल लोगों की भूमिका का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

