Medininagar : पलामू जिले में वर्ष 2010 में नियुक्त 251 अनुसेवकों की बर्खास्तगी के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है. समायोजन की मांग को लेकर बर्खास्त अनुसेवक संघ ने पदयात्रा व प्रदर्शन के माध्यम से मुख्यमंत्री आवास जाने का निर्णय लिया है. पदयात्रा की शुरुआत शनिवार को मेदिनीनगर से हुई.
बर्खास्त अनुसेवकों ने बताया कि वर्ष 2010 में चतुर्थवर्गीय पदों के लिए पैनल तैयार किया गया था. सरिता कुमारी बनाम झारखंड सरकार मामले में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद कोडरमा जिले की तर्ज पर वर्ष 2017 में लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर चयन किया गया. इसमें पलामू जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अनुसेवकों की नियुक्ति की गई. सभी 7 से 8 वर्षों तक सेवा में कार्यरत रहे.
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद उक्त विज्ञापन को त्रुटिपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया गया. इसके आधार पर तत्कालीन डीसी शशि रंजन ने बिना किसी पूर्व सूचना व स्पष्टीकरण के सभी 251 अनुसेवकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया. बर्खास्त अनुसेवकों का कहना है कि इसी प्रक्रिया के तहत झारखंड के अन्य जिलों में आज भी अनुसेवक कार्यरत हैं. ऐसे में केवल पलामू जिले में की गई कार्रवाई भेदभावपूर्ण व अन्यायपूर्ण है.
संघ के अनुसार, बर्खास्तगी के बाद सभी अनुसेवक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. बैंक ऋण, पारिवारिक जिम्मेदारियों और बेरोजगारी के दबाव में दो अनुसेवकों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है. कई अन्य मानसिक तनाव में हैं. कुछ अनुसेवकों के सामने जीवन यापन का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है.
समायोजन की मांग को लेकर बर्खास्त अनुसेवकों ने कई बार मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग को ज्ञापन सौंपा और धरना-प्रदर्शन भी किया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. कोई लिखित आदेश या ठोस पहल नहीं की गई. इससे नाराज बर्खास्त अनुसेवक संघ ने अब रांची कूच का एलान किया है. संघ का कहना है कि पदयात्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री को अपनी पीड़ा से अवगत कराते हुए समायोजन की मांग की जाएगी. संघ ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों से सहयोग की अपील की है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.



Leave a Comment