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मार्च में ही सूखने लगी पलामू की लाइफलाइन कोयल नदी

  • घाटों व तटों का जलस्तर सूखने के कगार पर
  • कई घाटों पर दिखने लगी रेत

Rewti Raman 

 

Palamu :  पलामू की लाइफलाइन मानी जाने वाली कोयल नदी इस वर्ष मार्च महीने में ही सूखने लगी है. जिले के कई घाटों और तटों पर पानी का स्तर काफी कम हो गया है और कई जगहों पर रेत के टीले दिखाई देने लगे हैं.

 

गर्मी की शुरुआत में ही नदी का जलस्तर गिरने से आसपास के गांवों में पेयजल और सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. वहीं मेदिनीनगर निगम में पानी की किल्लत होने की आशंका जताई जा रही है.

 

रिकॉर्ड बारिश के बाद भी नहीं टिक पाया पानी

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पलामू जिले में अच्छी वर्षा दर्ज की गई थी. जून 2025 में 252.9 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 121.6 मिमी से लगभग 108 प्रतिशत अधिक थी.  वहीं जून से अगस्त 2025 के बीच जिले में करीब 960 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई.

 

अच्छी बारिश के कारण जिले में लगभग 97 प्रतिशत धान की रोपनी संभव हो सकी थी. इसके बावजूद गर्मी शुरू होते ही कोयल नदी का जलस्तर तेजी से गिरने लगा है, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. 

 

 

रेनशैडो क्षेत्र होने से हर साल गहराता जल संकट

बताते चलें कि पलामू का अधिकांश इलाका रेनशैडो एरिया के अंतर्गत आता है. इसी कारण यहां सामान्य या औसत से कम वर्षा होती है. पिछले वर्ष को छोड़ दें तो बीते करीब दस वर्षों में जिले के भूगर्भ जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है. इसका असर नदियों, कुओं और तालाबों पर भी साफ दिखाई देता है.

 

गर्मी में मेदिनीनगर निगम क्षेत्र में बढ़ जाती है परेशानी

गर्मी के मौसम में जिला मुख्यालय मेदिनीनगर सहित नगर निगम क्षेत्र में हर साल पेयजल की समस्या गंभीर हो जाती है. कई मोहल्लों में लोगों को पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है और कई स्थानों पर टैंकर के सहारे जलापूर्ति करनी पड़ती है.

 

रबर डैम योजना घोषणा के बाद भी अधूरी

कोयल नदी में पानी रोकने के लिए कुछ वर्ष पहले पूर्व मंत्री द्वारा रबर डैम बनाने की घोषणा की गई थी. इस योजना से उम्मीद थी कि नदी में साल भर पानी का स्तर बना रहेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा. हालांकि यह योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी.

 

मंडल डैम परियोजना भी वर्षों से अधूरी 

कोयल नदी से जुड़ी बहुप्रतीक्षित मंडल डैम परियोजना की भी शुरुआत की गई थी. इस परियोजना के पूरा होने से पलामू सहित आसपास के क्षेत्रों में जल संचयन और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन यह योजना भी वर्षों से अधूरी है.

 

मोहम्मदगंज का भीम बराज ही पानी रोकने का सहारा

फिलहाल कोयल नदी में पानी रोकने की व्यवस्था मुख्य रूप से मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज में ही है, जिसे स्थानीय लोग भीम बराज के नाम से जानते हैं. इसी बराज के सहारे आसपास के क्षेत्रों में कुछ हद तक पानी का संचय हो पाता है. हालांकि इससे बिहार के औरंगाबाद सहित कई हिस्से सिंचित होते हैं.

 

मेदिनीनगर के आसपास डैम निर्माण की पहल नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा मेदिनीनगर के आसपास डैम या रबर डैम बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है. यदि समय रहते जल संरक्षण की दिशा में बड़े स्तर पर योजना बनाई जाती तो पलामू में हर वर्ष उत्पन्न होने वाली जल संकट की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकता था.

 

 

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