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जमीन म्यूटेशन और भू-राजस्व व्यवस्था पर सदन में जोरदार बहस, बाबूलाल बोले-रसीद कटवाने के लिए पैसे मांगे जाते

झारखंड विधानसभा में जमीन म्यूटेशन और भू-राजस्व व्यवस्था पर व्यापक चर्चा हुई. विधायक राजेश कच्छप ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि दिसंबर 2000 से पहले जमीन खरीदने वाले कई लोग अब तक म्यूटेशन नहीं करा पाए हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों के समाधान के लिए क्या व्यवस्था की गई है.
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  • बाबूलाल ने कहा-50,000 म्यूटेशन के लिए मांगा गया
  • विधायकों ने उठाए कई सवाल

Ranchi : झारखंड विधानसभा में जमीन म्यूटेशन और भू-राजस्व व्यवस्था पर व्यापक चर्चा हुई. विधायक राजेश कच्छप ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि दिसंबर 2000 से पहले जमीन खरीदने वाले कई लोग अब तक म्यूटेशन नहीं करा पाए हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों के समाधान के लिए क्या व्यवस्था की गई है.

 

इस पर जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि वर्तमान में रजिस्ट्री के बाद जमीन का विवरण ऑटो जेनरेटेड प्रक्रिया के माध्यम से सीधे रजिस्ट्री कार्यालय से अंचल कार्यालय तक पहुंचता है और वहीं से म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी की जाती है.

 

उन्होंने कहा कि जो लोग किसी कारणवश म्यूटेशन नहीं करा पाए हैं, उन्हें एलआरडीसी (LRDC) के यहां आवेदन देना होगा. जांच के बाद उनके मामले का निष्पादन किया जाएगा.

 

झारखंड विधानसभा बजट सत्र लाइव देखें...

 

इस पर विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि अंचल कार्यालयों में अधिकारियों द्वारा लोगों की समस्याएं नहीं सुनी जातीं. उन्होंने कहा कि कई बार विधायक द्वारा फोन करने के बाद भी काम नहीं होता.

 

वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी भू-राजस्व व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीन की रसीद कटवाने के लिए लोगों से पैसे की मांग की जाती है. उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र के एक व्यक्ति ने रांची में जमीन खरीदी थी और म्यूटेशन कराने के लिए उससे 50 हजार रुपये की मांग की गई.

 

विधायक नवीन जायसवाल ने सुझाव देते हुए कहा कि वर्ष 2015-16 तक मैन्युअल रसीद काटी जाती थी. भू-राजस्व विभाग को पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर जिनकी जमीन अब तक ऑनलाइन नहीं हुई है, उन्हें ऑनलाइन करने का अभियान चलाना चाहिए.

 

सदन में मौजूद कई सदस्यों ने अंचल कार्यालयों की कार्यप्रणाली और कर प्रणाली पर भी सवाल उठाए. इसी दौरान विधायक अमित यादव ने कहा कि सोमा मुंडा के नाम से दखल-दिहानी के लिए 17 मार्च 2011 को आदेश पारित किया गया था, लेकिन अब तक उस पर कार्रवाई नहीं हो सकी है.

 

इस पर मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि मामले की पुनः सुनवाई कर उसका निष्पादन कर दिया जाएगा. हालांकि विधायक ने कहा कि जब पहले से आदेश पारित है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए.

 

 

 

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