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संसदीय समिति ने की अनुशंसा, रेजिडेंट डॉक्टरों के ड्यूटी नियम पायलटों के समान हो, यूडीएफ ने स्वागत किया

समिति ने कहा कि दोनों के काम जीवनरक्षा से जुड़ा हुए हैं. इसलिए इन पर काम की थकान का बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा लगातार ड्यूटी किये जाने के कारण थकान और इलाज में त्रुटियों की संभावना बनी रहती है. इससे रोगी की सुरक्षा  खतरे में पड़ सकती है.
 

 New Delhi :स्वास्थ्य मामलों पर सपा सांसद प्रो रामगोपाल यादव की अध्यक्षता में बनी संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में  देश के रेजिडेंट डॉक्टरों के ड्यूटी के नियम पायलटों की तरह रखने का सुझाव दिया है.  

 

समिति ने कहा कि दोनों के काम जीवनरक्षा से जुड़े हुए हैं. इसलिए इन पर काम की थकान का बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा लगातार ड्यूटी किये जाने के कारण थकान और इलाज में त्रुटियों की संभावना बनी रहती है. इससे रोगी की सुरक्षा  खतरे में पड़ सकती है.

 

समिति ने अनुशंसा की है कि डॉक्टरों की थकान के कारण दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जीवन सुरक्षा से जुड़े सिविल एविएशन जैसे काम से तुलना की जाये. कहा है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए अनिवार्य आराम अवधि और निगरानी वाले रोस्टर के साथ एक क्लिनिकल ड्यूटी घंटे विनियमन नीति तैयार कर उसे सख्ती से लागू किया जाये 

 

यूडीएफ के चेयरपर्सन डॉ लक्ष्य मित्तल ने समिति की अनुशंसा का स्वागत किया है. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए पायलटों जैसा ड्यूटी नियम लागू करने का आग्रह किया है.

 

डॉ लक्ष्य मित्तल ने अपने पत्र में कहा है कि पायलटों के ड्यूटी नियम के कारण उनमें थकान कम होती है और उड़ान में सुरक्षा बढ़ती है. इसी तरह रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए भी ड्यूटी नियम लागू करने से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी. इससे चिकित्सा त्रुटियों को कम किया जा सकेगा.

 

उन्होंने जेपी नड्डा से मांग की हैकि यूनिफॉर्म रेजीडेंसी स्कीम 1992 को लागू करने के लिए सख्त निर्देश जारी किये जायें. डॉ लक्ष्य मित्तल ने आग्रह किया है कि एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाये,जो सिविल एविएशन ड्यूटी घंटा नियमों के अनुसार रेजिडेंट डॉक्टरों के नियम बनाने का काम करे.

 

डॉ लक्ष्य मित्तल ने कहा कि 1992 के नियम के अनुपालन संबंधी उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाये. नियम लागू न होने पर सजा का प्रावधान हो. उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इस विषय पर यूडीएफ ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर की है. लेकिन सरकार अपना ही आदेश लागू करने के लिए अदालत के डंडे का इंतजार करे, यह बेहद शर्मनाक है.

 

यूडीएफ के चेयरपर्सन ने कहा कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 1992 में यूनिफॉर्म रेजीडेंसी स्कीम बनाई थी. इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए 48 घंटे प्रति सप्ताह और एक बार में अधिकतम 12 घंटे ड्यूटी का नियम है. लेकिन अधिकतर मेडिकल कॉलेज इसका पालन नहीं कर रहे हैं.

 

चेयरपर्सन ने कहा कि 1992 की नियमावली का उल्लंघन कर अधिक काम कराना बीएनएस की धारा 146 के तहत अपराध है. अगर रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के वास्तविक घंटों का रिकॉर्ड न रखा जाता हो तो बीएनएस की धारा 337, 340 और 344 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि नियमों के उल्लंघन को आपराधिक दायरे में लाने पर ही मेडिकल स्टूडेंट्स की आत्महत्या और सीट छोड़ने की समस्या का समाधान हो सकेगा.

 

 

 
 

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