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सबरीमाला : जस्टिस नागरत्ना की अहम टिप्पणी, महिला के साथ 3 दिन तक अछूत जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता...

संविधान पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, एमएम सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं.
 

New Delhi : केरल के सबरीमाला मामले में आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस नागरत्ना ने  एक अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा, किसी भी महिला के साथ  महीने में 3 दिन तक (menstruation के आधार पर)  अछूत जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता. और फिर चौथे दिन उसे अछूत नहीं माना जायेगा.  


 

 

जस्टिस नागरत्ना की यह टिप्पणी तब आयी है, जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने 2018 के सबरीमाला फैसले की उस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई,  जिसमें कहा गया था कि 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकना संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत अछूत प्रथा के बराबर है.

 


बता दें कि नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ  केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और कई धर्मों में प्रचलित धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. 
    
 


संविधान पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, एमएम सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं. 

 

 

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