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अंशकालीन शिक्षक केस: HC में सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर

  • -    हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कल्याण विभाग ने नहीं लिया फैसला
  • -    समान काम के बावजूद 200 रुपये प्रति घंटी मानदेय का विरोध
  • -    राज्यभर में 375 शिक्षक प्रभावित, अब तक नहीं मिला सेवा विस्तार

Ranchi: झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित आवासीय विद्यालयों के अंशकालीन शिक्षक सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने की तैयारी में हैं. राज्यभर से रांची पहुंचे बुधवार को 100 से अधिक शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर करने के लिए अधिवक्ता अजीत कुमार के माध्यम से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 

 

13 जनवरी 2026 को झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आनंदा सेन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए विभागीय सचिव को 12 सप्ताह के भीतर अंशकालीन शिक्षकों के मुद्दे पर नीति तय करने का निर्देश दिया था. लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि कल्याण विभाग ने अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया है. शिक्षकों का कहना है कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभाग ने तय समयसीमा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया. इसलिए यह कदम उठाने पर विवश हैं.

 

क्या आदेश था और कहां अटका मामला?

सिलास मुर्मू ने वर्ष 2022 में अधिवक्ता अजीत कुमार के माध्यम से झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया था कि कल्याण विभाग के द्वारा दो तरह के विद्यालय का संचालन किया जाता है. जिसमें आवासीय विद्यालय एवं दिवाकालीन पहाड़िया विद्यालय शामिल है. इसी वर्ष 13 जनवरी को याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने विभाग को 12 सप्ताह के भीतर समान काम के लिए समान वेतन देने का निर्णय लेने का आदेश दिया. 

 

राज्यभर में 50 स्कूल संचालित

राज्य के करीब 50 विद्यालयों में कार्यरत लगभग 375 शिक्षक आज भी घंटी आधारित भुगतान प्रणाली पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रति घंटी 200 रुपये मिलते हैं, जो नियमित शिक्षकों या दिवाकालीन पहाड़िया शिक्षकों की तुलना मंं काफी कम है. शिक्षकों का कहना है कि वे एक ही तरह की जिम्मेदारियां निभाते हैं—क्लास लेना, कॉपी जांचना, परीक्षा कार्य. फिर भी वेतन में भारी अंतर है.

 

10 साल की सेवा, फिर भी अस्थायी पहचान

इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि कई शिक्षक पिछले 8-10 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं. हर साल 31 मार्च को उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता है, जिससे वे स्थायी रूप से जुड़े रहते हैं, लेकिन अधिकार और सुरक्षा नहीं मिलती. शुक्षकों के मुताबिक इस साल स्थिति और गंभीर हो गई है, क्योंकि अभी तक विस्तार भी नहीं दिया गया है.

 

सेवा विस्तार भी लंबित 

शिक्षकों के मुताबिक, जब कोर्ट के आदेश के बाद भी कोई पहल नहीं हुई और विस्तार भी लंबित हो गया, तो उनके पास अवमानना याचिका दायर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. शिक्षक भोगला हांसदा और अमित श्रीवास्तव ने कहा कि “यह सिर्फ वेतन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है.”

 

अब आगे क्या ?

अवमानना याचिका दायर होने के बाद अब विभाग को कोर्ट में जवाब देना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया. अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है. याचिका दायर करने के लिए बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित हुए.


याचिका दायर करने शिवानन्द यादव, संदीप सिंह, संगीता कुमारी, राहुल कुमार, फूलचंद उरांव, अश्विन मंडल, रविन्द्र कुमार, एलाजाबेथ इक्का, गोविंद पत्रों, प्रशांत, वासुदेव लायक, मनोरंजन महतो, हीरालाल महतो, चित्रलेखा हेंब्रम, मरियम, सुजीत, जोली, फ्लोरेंस, नुसरत, पूनम, किरण कुमारी, पुनीता, संतोषी, उषा हांसदा, अनूप , प्रतिमा, श्रीराम, अजीत सोरेन, शिल्पा, जुबिलेंस, तारा, गौरव, पुष्पलता मरांडी, दमन हेंब्रम, अधीर राणा, अंकित, राधा, प्रधान माझी पहुंचे. 

 

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