Search

शराब बरामदगी के दो साल बाद मकान सील करना गैरकानूनी , पटना HC ने सरकार पर लगाया 50,000 का जुर्माना

Lagatar Desk :   बिहार में शराबबंदी कानून के तहत प्रशासनिक कार्रवाई की समय-सीमा और वैधानिक प्रक्रिया को लेकर पटना हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने जहानाबाद में शराबबंदी कानून के तहत दो साल बाद मकान सील करने की कार्रवाई को गैरकानूनी करार दिया है.

 

न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता नीलम देवी के मकान को तुरंत खोलने का आदेश दिया है. साथ ही याचिकाकर्ता को परेशान करने के लिए राज्य सरकार पर 50,000 का जुर्माना लगाया है. 

 

नीलम देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि यदि किसी मकान से शराब की बरामदगी होती है, तो संबंधित कानून के अनुसार उसी समय या तत्काल प्रभाव से सीलिंग की कार्रवाई होनी चाहिए. वर्षों बाद की गई सीलिंग न केवल कानून की मंशा के खिलाफ है, बल्कि वैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन है. 

 

शराब बरामद होने के दो साल बाद घर किया सील

दरअसल  यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज जहानाबाद थाना कांड संख्या 797/2019 से संबंधित है. इस प्रकरण में नीलम देवी के पुत्र के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पुलिस ने छापेमारी के दौरान मकान से 8.25 लीटर विदेशी शराब बरामद करने का दावा किया था.

 

हालांकि, छापेमारी के समय न तो मकान को सील किया गया और न ही तत्काल कोई सीलिंग आदेश जारी हुआ. इसके बाद लगभग दो वर्ष बाद 31 जनवरी 2022 को पुलिस ने अचानक मकान का एक हिस्सा सील कर दिया. नीलम देवी ने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 

 

हाई कोर्ट में रखी गई दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम की धारा 62 के तहत बरामदगी के तुरंत बाद ही किसी भवन को सील किया जा सकता है. दो साल बाद की गई कार्रवाई पूरी तरह मनमानी और कानून के विपरीत है. वहीं, राज्य सरकार ने कार्रवाई में देरी के लिए कोविड-19 महामारी का हवाला दिया और कहा कि शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन को व्यापक अधिकार प्राप्त हैं. 

 

कोर्ट का सख्त रुख

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि यदि 2019 में सीलिंग आवश्यक थी, तो उसी समय कार्रवाई की जानी चाहिए थी. दो वर्षों की देरी के लिए सरकार कोई ठोस और कानूनी कारण प्रस्तुत करने में असफल रही. 

 

न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा ने कहा कि धारा 62 का उद्देश्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और अवैध गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाना है. जब लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो बाद में सीलिंग का कोई औचित्य नहीं रह जाता. 

 

नागरिक अधिकारों पर टिप्पणी

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि शराबबंदी कानून के नाम पर आम नागरिकों को परेशान करना स्वीकार्य नहीं है. बिना वैध कारण किसी का मकान सील करना संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है. इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने मकान को तत्काल अनसील करने का आदेश दिया और राज्य सरकार पर 50,000 का जुर्माना लगाया.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp