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पश्चिम बंगाल एसआईआर पर दायर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में खारिज, कहा, अपीलीय न्यायाधिकरण में जायें

न्यायमूर्ति बागची ने चुनाव आयोग से पूछा. अगर 10फीसदी मतदाता वोट नहीं डालते हैं और जीत का अंतर 10 फीसदी से अधिक है, तो क्या होगा? फिर कहा,  अंतर 2 फीसदी है और मतदान के लिए चिह्नित 15फीसदी मतदाता वोट नहीं कर पाये तो क्या होगा.
 

New Delhi :  पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई.  सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को premature  करार देते हुए खारिज कर दिया.

 

कोर्ट ने कहा कि वे चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकते.  मतदाता संबंधित न्यायाधिकरणों में अपनी शिकायतें दर्ज करायें.  कोर्ट ने कहा कि चूँकि आपत्तियां और दावे (34 लाख से अधिक) पहले ही ट्रिब्यूनल के पास हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा. 

 

हालांकि न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने एसआईआर  प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए मतदाता सूची से हटाये गये लोगों द्वारा दायर अपीलों पर विचार करने के लिए मजबूत अपीलीय तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया.

 

न्यायमूर्ति बागची ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने अन्य राज्यों की प्रक्रिया से इतर तार्किक विसंगति यानी लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी नामक नयी विधा पेश की. साथ ही कहा कि बिहार एसआईआर मामले में अपनाये गये रुख से चुनाव आयोग भटक गया.

 

 बिहार एसआईआर मामले में कहा गया था कि 2002 की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों को दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार न्यायमूर्ति बागची ने चुनाव आयोग से पूछा. अगर 10फीसदी मतदाता वोट नहीं डालते हैं और जीत का अंतर 10फीसदी से अधिक है.तो क्या होगा?

 

न्यायमूर्ति बागची ने फिर कहा,  अंतर 2फीसदी है और मतदान के लिए चिह्नित 15फीसदी मतदाता वोट नहीं कर पाये तो क्या होगा.हमें इस पर निश्चित रूप से विचार करना चाहिए.हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है.

 

न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों से अत्यधिक दबाव वाली परिस्थितियों में 100फीसदी सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती. कहा कि जब कोई व्यक्ति कम समय सीमा के अंदर यदि  प्रतिदिन 1000 से अधिक दस्तावेजों को निपटा रहा हो, तो 70फीसदी सटीकता भी उत्कृष्ट मानी जायेगी.  

 

सुनवाई के बाद  सीजेआई ने याचिकाएं स्वीकार करने से मना करते हुए कहा, यह बेहतर होगा  कि याचिकाकर्ता अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष जायें. यह कहते हुए पीठ ने याचिकाएं खारिज कर दी, हालांकि याचिकाकर्ताओं के लिए अपील का उपाय खुला रखा.

 

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