Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के जरिए मांग की गई है कि रांची और राज्य के अन्य हिस्सों में बार, रेस्तरां, पार्टियों और इवेंट्स में नशीले पदार्थों की कथित सप्लाई से जुड़ी खबरों की जांच कर रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए. रांची के सामलोंग निवासी सुनील कुमार महतो ने यह याचिका दायर की है. याचिका में राज्य सरकार, DGP, रांची SSP, लालपुर और गोंदा थाना प्रभारी, ड्रग कंट्रोलर, NCB रांची जोन, रांची नगर निगम और कई बार-रेस्तरां को प्रतिवादी बनाया गया है.
जनहित याचिका कहा गया है कि सार्वजनिक रूप से सामने आई खबरों की सक्षम अधिकारियों से कानूनन जांच कराई जाए, जिसमें इवेंट ऑर्गेनाइजरों और इवेंट कंपनियों की कथित भूमिका भी शामिल हो. सितंबर 2026 के बाद राज्य में हुई बड़ी नशीले पदार्थों और कफ सिरप की जब्तियों, दर्ज मामलों और जांच की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाए. 29 मार्च 2026 को "लॉर्ड ऑफ द ड्रिंक्स" में हुई पुलिस कार्रवाई का नतीजा बताया जाए.
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3 अक्टूबर की रात रांची के बार-होटलों में हुई छापेमारी में नशे से जुड़ी जांच शामिल थी या नहीं, यह स्पष्ट किया जाए. NCB केस संख्या 15/2026 (NDPS केस संख्या 147/2026) की स्थिति और संबंधित परिसरों की नगर निगम स्तर की नियामक स्थिति रिकॉर्ड पर आए. याचिका में कुछ प्रतिष्ठानों पर देर रात तक खुलने और नाबालिगों को शराब परोसने के आरोपों पर दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की गई है.
याचिका के अनुसार, सितंबर-अक्टूबर 2026 में मीडिया में छपी खबरों का उल्लेख किया गया है. जिसमें-
दुमका (24 सितंबर): 1,710 बोतल कफ सिरप और 7,200 अल्प्राजोलम टैबलेट जब्त, दो गिरफ्तार.
रांची (2 अक्टूबर): NCB और पुलिस ने नगड़ी थाना क्षेत्र में करीब 97 किलो गांजा पकड़ा, तीन गिरफ्तार.
खूंटी (4 अक्टूबर): 120 बोतल कफ सिरप और 2,295 टैबलेट के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार.
देवघर (24 अक्टूबर): करीब 1.8 किलो गांजा और 10.77 ग्राम संदिग्ध ब्राउन शुगर बरामद.
रांची-जमशेदपुर नेटवर्क (21-24 अक्टूबर): NCB की जांच में छह गिरफ्तार, करीब 18 ग्राम कोकीन, 16.5 ग्राम MDMA और 3.5 ग्राम गांजा जब्त. खबरों के मुताबिक एजेंसी रेव पार्टियों में सप्लाई और इवेंट कंपनियों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
खबरों में "द रुइन हाउस" (मोराबादी) और "ऑन द रॉक्स" (कांके रोड) के नाम NCB जांच के संदर्भ में आए. बताया गया कि इनके संचालकों को समन जारी हुआ है. इनकी संलिप्तता जांच का विषय है और परिसरों से किसी बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है.
याचिका में कहा गया है कि अखबार या ऑनलाइन रिपोर्टें अपने आप में सबूत नहीं हैं, इन्हें केवल सत्यापन योग्य संकेत के रूप में रखा गया है. किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ केवल उसके कारोबार, स्थान या रात में संचालन के आधार पर कोई धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए. NDPS एक्ट की धारा 25 तभी लागू होती है जब मालिक या संचालक जानबूझकर परिसर का उपयोग अपराध के लिए होने दें. कुछ प्रतिष्ठानों के नाम केवल सीमित सत्यापन के लिए शामिल किए गए हैं. इनके बारे में याचिकाकर्ता को नशे से जुड़ी कोई रिपोर्ट नहीं मिली, पर इन्हें देर रात तक चलने वाली पार्टियों के लिए जाना जाता है.
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 (स्वास्थ्य का अधिकार) और अनुच्छेद 47 का हवाला दिया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार वे पहले भी पर्यावरण और नियामक जवाबदेही के मुद्दे उठा चुके हैं और इससे पहले एक PIL दायर कर चुके हैं, जिसका निपटारा 29 अप्रैल 2026 को हुआ था.
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