Ranchi: बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर मंगलवार को सेंट्रल लाइब्रेरी, मोरहाबादी में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन पीपल्स यूथ फ्रंट, आदिवासी छात्र संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ और कुड़ुख भाषा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए लोगों ने भाग लिया.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीपल्स यूथ फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर ललित कुमार ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के जननायक थे. उन्होंने कहा कि आज भी उनके सपनों और विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि संघर्ष की राह पर चलने वालों को डराने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन इससे आंदोलन कमजोर नहीं होगा.
कार्यक्रम का उद्घाटन कुड़ुख विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बंदे खलखो ने किया. उन्होंने कहा कि मूलनिवासी समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा को केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके संघर्षों और विचारों को जीवन में उतारने की आवश्यकता है.
संगोष्ठी में वक्ता के रूप में शामिल मुंडारी विभाग के प्रो. किशोर सुरीन ने कहा कि आदिवासी और मूलनिवासी समाज को मिलकर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर आगे की लड़ाई लड़नी होगी. वहीं मूलनिवासी चिंतक द्वारिका दास ने समाज में व्याप्त शोषण और असमानता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत बताई.
कार्यक्रम में प्रो. बहलेन होरो, पीपल्स यूथ फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष अमनदीप मुंडा, महासचिव महावीर उरांव, रामदयाल उरांव, कुंवर उरांव, कुलपति मुंडा, सुरेंद्र लोहरा, रतन बेदिया, बिरसू बेदिया, अमृत मुंडा, पूजा किस्पोट्टा समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
कार्यक्रम का संचालन संजय महली ने किया. संगोष्ठी में वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और उनके सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला.
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