Ranchi: DSPMU में आज सीटों में कटौती, आरक्षण नीति के पालन और छात्र हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन उग्र हो गया. विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई और प्रशासनिक भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया.
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ट्रेडिशनल और वोकेशनल स्नातक पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या में भारी कटौती कर दी है. उनका कहना है कि झारखंड के गरीब और मध्यमवर्गीय छात्र महंगे निजी संस्थानों में बीसीए, बीबीए, बीकॉम सहित अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में सरकारी विश्वविद्यालयों में सीटें कम होने से बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं या उन्हें दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ेगा.
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में जारी नामांकन सूची में राज्य सरकार की आरक्षण नीति का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. छात्रों ने मांग की कि नामांकन प्रक्रिया को आरक्षण नियमों के अनुरूप दोबारा लागू किया जाए, ताकि सभी वर्गों के छात्रों को उनका अधिकार मिल सके.

विभिन्न छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. छात्रों ने कहा कि कुलपति को छात्रों के बीच आकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए.
छात्रों का कहना है कि कई सप्ताह से लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. इससे नाराज छात्रों ने प्रशासनिक भवन के बाहर कुलपति का पुतला दहन किया. प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने कुलपति की गाड़ी पर स्याही फेंकी.
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया. फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है.
छात्रों की प्रमुख मांगें
1. ट्रेडिशनल एवं वोकेशनल विभागों में सीटों की संख्या तत्काल पूर्ववत की जाए या बढ़ाई जाए.
2. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में लंबित शिक्षक नियुक्तियों को जल्द शुरू कर स्थायी नियुक्ति की जाए.
3. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के छात्रों की फीस अनारक्षित श्रेणी की तुलना में 50 प्रतिशत कम की जाए.
4. SC/ST छात्रों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
5. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग द्वारा एक माह की विशेष कार्यशाला आयोजित की जाए.
6. कॉमर्स एवं बीबीए विभाग में आधुनिक विषयों के लिए स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए.
7. विश्वविद्यालय में SC/ST रोस्टर एवं बैकलॉग पदों पर पारदर्शी और स्थायी भर्ती शुरू की जाए.
8. SC/ST एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क रिमेडियल कोचिंग शुरू की जाए.
9. SC/ST सेल के माध्यम से जनजातीय मुद्दों एवं अधिकारों पर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के सेमिनार आयोजित किए जाएं.
10. पीएचडी नियमावली (ऑर्डिनेंस) तैयार कर आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पारित कराया जाए.
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द लिखित और समयबद्ध निर्णय नहीं लेता है, तो विश्वविद्यालय परिसर में उनका अनिश्चितकालीन धरना और आंदोलन जारी रहेगा.
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