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ED के जांच अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की, पढ़ें हाईकोर्ट ने आदेश में क्या कहा..

Ranchi: प्रवर्तन निदेशालय के (ईडी) के अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की. मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाया गया है. मामला असाधारण परिस्थितियों से संबंधित है. न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी ने ईडी अधिकारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच सीबीआई के हवाले करने से संबंधित अपने फैसले में इस बात का उल्लेख किया है.
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Ranchi: प्रवर्तन निदेशालय के (ईडी) के अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की. मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाया गया है. मामला असाधारण परिस्थितियों से संबंधित है. न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी ने ईडी अधिकारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच सीबीआई के हवाले करने से संबंधित अपने फैसले में इस बात का उल्लेख किया है.


न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि सभी पक्षों की दलील सुनने बाद यह पाया गया कि ईडी के अधिकारी के खिलाफ जिस व्यक्ति ने मारपीट का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी है, वह खुद पेयजल घोटाले का अभियुक्त है. पुलिस ने इस व्यक्ति (संतोष कुमार) के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की है. ईडी के जिस अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाये गये हैं वह हाई प्रोफाइल मामले की जांच कर रहा है. इसमें प्रभावशाली लोग और राजनीतिज्ञ शामिल हैं. 

 

 


पेयजल घोटाले के अभियुक्त द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी पर पुलिस ने कार्रवाई करने में जल्दबाजी दिखायी है. पहली नजर में ऐसा लगता है कि पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की. मामले में असाधारण परिस्थितियों के मद्देनजर इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है. इसलिए एयरपोर्ट थाने में दर्ज प्राथमिकी 5/2026 की जांच सीबीआई को सौंपी जाती है. 

 

न्यायालय ने सीबीआई निदेशक को मामले में प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार, जांच करने का आदेश दिया है. न्यायालय ने एयरपोर्ट के थाना प्रभारी को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई के हवाले करने का आदेश दिया है.


उल्लेखनीय है कि 23 करोड़ रुपये के पेयजल घोटाले में आगे की जांच के लिए ईडी ने संतोष कुमार को समन भेजा था. लेकिन उसने पूछताछ के लिए हाजिर होने के बदले ईडी को मेल भेज कर यह सूचित किया था कि वह बीमार है. उसका इलाज चल रहा है. इसके बाद अचानक वह ईडी के दफ्तर पहुंच कर अपना बयान दर्ज कराने की बात कही. ईडी ने इसे स्वीकार कर लिया और उससे पूछताछ शुरू की. 


पूछताछ के दौरान उसने पानी का जग उठा कर अपने सिर पर मार लिया. इसके बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां उसने खुद ही अपने सिर में चोट लगाने की बात स्वीकार की. मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर ने उसे फिट घोषित किया. इस घटना के बाद उसने 13 जनवरी को ईडी के अधिकारी पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस अधिकारियों के दल भारी पुलिस बल के साथ 15 जनवरी की सुबह ईडी के ऑफिस पहुंचा. पुलिस ने ईडी कार्यालय को क्राइम सीन की तरह ट्रीट किया.


ईडी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर संतोष कुमार द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी की सीबीआई जांच का अनुरोध किया. याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से ईडी की याचिका पर सुनवाई को सक्षम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए सुनवाई से मुकर जाने का अनुरोध किया गया. लेकिन हाईकोर्ट के रोस्टर में संबंधित मामले की सुनवाई का अधिकार होने की वजह से सरकार के अनुरोध को खारिज करते हुए मामले की सुनवाई की गयी. न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. न्यायालय ने 11 मार्च को अपना फैसला सुनाया. 


सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से भारत सरकार के एएसजी एसवी राजू, जोहेब हुसैन, अमित कमार दास, सौरभ कुमार, वरूण गिरधर, मनमोहित भल्ला ने दलील पेश की. राज्य सरकार की ओर से एन नागामुथू, ए केशव, शुभम गुप्ता से दलील पेश की. सीबीआई की ओर से दीपक भारती और केंद्र सरकार की ओर प्रशांत पल्लव ने दलील पेश की.

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