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Hazariabh News: चौपारण में बच्चों को पिलाई गई पोलियो ड्राप

चौपारण प्रखंड की सभी 26 पंचायतों में रविवार को पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई. प्रखंड के विभिन्न पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों, विद्यालयों एवं अन्य चिन्हित बूथों पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाई गई.
 

Hazaribagh: चौपारण प्रखंड की सभी 26 पंचायतों में रविवार को पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई. प्रखंड के विभिन्न पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों, विद्यालयों एवं अन्य चिन्हित बूथों पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाई गई.

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अभियान का उद्देश्य एक भी बच्चे को पोलियो की खुराक से वंचित नहीं रहने देना है. प्रखंड प्रमुख पूर्णिमा देवी ने एक आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया.

 

इस दौरान उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं, ताकि देश को पूरी तरह पोलियो मुक्त बनाए रखने के लक्ष्य को मजबूती मिल सके. उन्होंने कहा कि "दो बूंद जिंदगी की" केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है.

 

अभियान के तहत विभिन्न पंचायतों में जनप्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई. दैहर पंचायत में मुखिया प्रतिनिधि नागेंद्र कुशवाहा, जवनपुर में मुखिया जानकी यादव, बेला पंचायत में पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि बीरबल साव, चौपारण पंचायत में मुखिया प्रतिनिधि बिनोद कुमार सिंह, करमा में मुखिया देवंती देवी, बसरिया में मुखिया मंजू देवी, डेबो में मुखिया प्रतिनिधि मोहन साव तथा भगहर में मुखिया कृष्णा रविदास सहित अन्य पंचायतों के मुखिया एवं जनप्रतिनिधियों ने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर अभियान की शुरुआत कराई. 

 

अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक बूथ पर स्वास्थ्य विभाग की टीम, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं तथा सहिया दीदियां तैनात रहीं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रविवार को बूथ आधारित अभियान चलाया गया, जबकि सोमवार और मंगलवार को स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगे, जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके.

 

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि घर पर स्वास्थ्यकर्मी पहुंचें तो अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं, क्योंकि हर बच्चे तक दवा पहुंचना ही इस अभियान की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.

 

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