Ranchi : झारखंड में राज्यसभा चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर महागठबंधन के छह वोट कहां गए. चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन पूरी तरह आश्वस्त था कि उसके दोनों उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे. संख्या बल भी गठबंधन के पक्ष में था. लेकिन नतीजे आए तो भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर ली और महागठबंधन समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा.
परिणाम आते ही महागठबंधन के भीतर आरोपों का दौर शुरू हो गया. कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया गया कि गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद छह वोट आखिर कहां चले गए. कांग्रेस के इस रुख को राजद और भाकपा माले ने अपने ऊपर निशाना माना और फिर बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया. राजद के कुछ विधायक खुलकर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आए. कांग्रेस को गद्दार कहा गया. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू पर भी तीखे आरोप लगाए गए. जवाब में कांग्रेस ने भी अपने सभी 16 विधायकों की एकजुटता का दावा करते हुए आरोपों को खारिज कर दिया. देखते ही देखते छह वोटों का सवाल महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सियासी संग्राम में बदल गया.
इसी विवाद के बीच शनिवार को कांग्रेस ने शक्ति प्रदर्शन किया. प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव की मौजूदगी में 12 विधायक और मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए, जबकि चार अन्य विधायकों ने वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था.
कांग्रेस ने पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि यदि महागठबंधन के पास 56 वोट थे तो छह वोट आखिर गए कहां. पार्टी ने यह भी कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस उम्मीदवार के साथ नहीं बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व और गठबंधन की रणनीति के साथ भी विश्वासघात है. कांग्रेस ने मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद मुख्यमंत्री से जताई है.
उधर, भाजपा पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक लाभ उठाने में जुटी है. भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव ने महागठबंधन की अंदरूनी हकीकत उजागर कर दी है. भाजपा इस जीत को अपनी रणनीतिक सफलता और गठबंधन की कमजोरी के प्रमाण के रूप में पेश कर रही है.
अब सवाल सिर्फ एक राज्यसभा सीट का नहीं है. असली चुनौती मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने है. क्या वे छह वोटों का रहस्य सुलझा पाएंगे और गठबंधन में भरोसा बहाल कर पाएंगे, या फिर यह विवाद आने वाले दिनों में महागठबंधन की राजनीति को और मुश्किल में डाल देगा.
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