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Political News : बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से खिला कमल- बाबूलाल

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के राजनीतिक संघर्ष और कार्यकर्ताओं के बलिदान को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की ताकत किसी की मेहरबानी या चुनाव आयोग की वजह से नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के खून-पसीने और संघर्ष से खड़ी हुई है.
 

Ranchi : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के राजनीतिक संघर्ष और कार्यकर्ताओं के बलिदान को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की ताकत किसी की मेहरबानी या चुनाव आयोग की वजह से नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के खून-पसीने और संघर्ष से खड़ी हुई है.

 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कुछ लोग अब भी यह मानते हैं कि बंगाल में भाजपा को मिली सफलता EVM, केंद्रीय बलों या दिल्ली के समर्थन की वजह से है, जबकि सच्चाई यह है कि वहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक हिंसा, दमन और राजनीतिक प्रताड़ना झेली है. उन्होंने दावा किया कि बंगाल में कमल का फूल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के बलिदान से खिला है.

 

उन्होंने कहा कि 2011 से 2025 तक का दौर भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए बेहद कठिन रहा. कई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, कई परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा और राजनीतिक हिंसा के कारण लोगों को डर और दहशत के माहौल में जीना पड़ा. मरांडी ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थकों को सिर्फ पार्टी का समर्थन करने की वजह से निशाना बनाया गया.

 

मरांडी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपना मनोबल नहीं टूटने दिया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, वे भी पार्टी के लिए मजबूती से खड़े रहे और संघर्ष जारी रखा. उनके अनुसार, यह हिम्मत किसी सरकारी व्यवस्था से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और विचारधारा से आती है.

 

उन्होंने बंगाल में भाजपा के राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया. मरांडी ने कहा कि 2011 में भाजपा के पास केवल एक विधायक था, लेकिन लगातार संघर्ष के बाद पार्टी ने 2019 लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की और 2021 विधानसभा चुनाव में मुख्य विपक्ष की भूमिका में पहुंची. उन्होंने दावा किया कि भाजपा का यह विस्तार लंबे संघर्ष और कार्यकर्ताओं के समर्पण का परिणाम है.

 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बंगाल में भाजपा की स्थिति को गिफ्ट या सेटिंग कहना उन कार्यकर्ताओं और परिवारों का अपमान है जिन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया और अपनी जान तक गंवाई. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र, आत्मसम्मान और राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई रही है.

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