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स्थानीय भाषाओं के मुद्दे पर झारखंड में सियासत तेज, शिक्षक संघ के गंभीर आरोप

झारखंड में स्थानीय भाषाओं के अधिकार को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राज्य की मूल भाषाओं के साथ कथित हक-मारी करने का आरोप लगाया है.
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Ranchi: झारखंड में स्थानीय भाषाओं के अधिकार को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राज्य की मूल भाषाओं के साथ कथित हक-मारी करने का आरोप लगाया है.


संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंदन कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, कुड़ुख, खोरठा, कुरमाली, नागपुरी और पंचपरगनिया झारखंड की मूल भाषाएं हैं. उन्होंने जोर दिया कि इन भाषाओं को JTET और अन्य शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में प्राथमिकता देना राज्य निर्माण की भावना के अनुरूप है.


शिक्षक संघ ने भाजपा की राज्य इकाई पर आरोप लगाया है कि वह बाहरी भाषाओं को बढ़ावा देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है. पत्र में कहा गया है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा हाल में दिए गए ज्ञापन का झारखंडी छात्रों द्वारा विरोध किया जा रहा है. संघ के मुताबिक, इससे राज्य में भाषायी विवाद को फिर से हवा मिल सकती है.


संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि किसी भी परिस्थिति में बाहरी भाषाओं को राज्य में लागू न किया जाए. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसा हुआ तो प्रशिक्षित शिक्षक संघ और स्थानीय युवा उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे. संघ के पदाधिकारियों - चंदन कुमार, मनीष चंद्रा, अजय कुमार और विमल कुमार ने उम्मीद जताई है कि सरकार स्थानीय युवाओं और मूल भाषाओं के हितों की रक्षा करेगी.

 

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