Ranchi: फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की पॉलिसी सजेशंस उप समिति की बैठक रविवार को चैम्बर भवन में आयोजित की गई. बैठक में ‘प्लास्टिक कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर विस्तृत चर्चा हुई. सदस्यों ने कहा कि प्लास्टिक कचरे की चुनौती का समाधान केवल प्रतिबंध लगाने से नहीं, बल्कि व्यावहारिक और सस्टेनेबल ट्रांजिशन के जरिए संभव है.
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्लास्टिक उद्योग देश में लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराता है तथा पैकेजिंग, कृषि, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के साथ उद्योग और रोजगार के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है.
चर्चा के दौरान सुझाव दिया गया कि अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले और सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से नियंत्रण किया जाए, वहीं प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए. साथ ही उत्पाद निर्माताओं की कचरा संग्रहण और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) में जवाबदेही तय करने तथा रीसाइक्लिंग उद्योग को वित्तीय और नीतिगत सहयोग देने की बात कही गई.
उप समिति के चेयरमैन शैलेन्द्र सुमन ने कहा कि प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, परिवहन और निस्तारण में प्लास्टिक गार्बेज बैग की अहम भूमिका है. उन्होंने कहा कि गीले और सूखे कचरे के सुरक्षित संग्रहण और परिवहन के लिए इनका उपयोग आवश्यक है, जिससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी और स्वच्छ बन सकती है.
सदस्यों ने राज्य सरकार से मांग की कि प्लास्टिक गार्बेज बैग को सिंगल यूज प्लास्टिक की श्रेणी से अलग रखा जाए और इनके निर्माण, बिक्री एवं उपयोग की अनुमति दी जाए, ताकि नगर निकायों, अस्पतालों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों को वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन में सुविधा मिल सके.
बैठक में चैम्बर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, सह सचिव रोहित पोद्दार, कार्यकारिणी सदस्य मुकेश अग्रवाल, अमित शर्मा, उप समिति चेयरमैन शैलेन्द्र सुमन, सदस्य कुणाल विजयवर्गीय, अनिश सिंह, विजय कुमार महतो, किशन अग्रवाल सहित कई सदस्य उपस्थित रहे.
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