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प्रदीप यादव ने सदन में उठाया मतदाता सूची से नाम हटाने और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक प्रदीप यादव ने मतदाता सूची, ओबीसी आरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए. प्रदीप यादव ने देश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं.
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Ranchi :   झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक प्रदीप यादव ने मतदाता सूची, ओबीसी आरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए. प्रदीप यादव ने देश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं.

 

उन्होंने दावा किया कि बिहार में 65 लाख और अन्य राज्यों में करीब एक करोड़ नाम हटाए गए हैं. झारखंड में भी पैरेंटल मैपिंग के नाम पर अब तक लगभग 12 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जा चुके हैं और यह संख्या 20 लाख तक पहुंच सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें आदिवासी, दलित, पिछड़े और मुसलमान समुदाय के लोगों को ज्यादा प्रभावित किया जा रहा है.

 

 

विधायक ने ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने दुमका में हुई चौकीदार बहाली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 50 प्रतिशत से अधिक आबादी होने के बावजूद ओबीसी वर्ग को एक भी पद नहीं मिला. उन्होंने सरकार से मांग की कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ पहल की जाए.

 

विधायक ने जातीय जनगणना कराने की भी मांग की, ताकि सभी वर्गों को उनका अधिकार मिल सके. कहा कि सरकार की मंशा अच्छी हो सकती है, लेकिन लालफीताशाही के कारण कई फैसले अटके हुए हैं. उन्होंने स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत नियोजन से जुड़े कानून को लेकर कहा कि अगर मामला हाई कोर्ट में लंबित है तो सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी चाहिए.

 

 

प्रदीप ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था में स्थानीय युवाओं के शोषण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई जगहों पर नौकरियों के नाम पर भारी वसूली की जा रही है. विधायक ने सर्वजन पेंशन योजना की सराहना करते हुए कहा कि बीपीएल की शर्त खत्म होने से लाभार्थियों की संख्या लगभग 14 लाख से बढ़कर करीब 64 लाख हो गई है.

 

इसके अलावा उन्होंने कहा कि कई अंचल अधिकारियों द्वारा सरकारी निर्देशों के बावजूद भूमिहीन और दलित लोगों को निवास प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने सरकार से इस पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की.

 

 

 

प्रदीप यादव ने अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता से जुड़े मामलों को जल्द सुलझाने और 1980 से लंबित भूमि सर्वेक्षण को पूरा करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि जमीन का सर्वे पूरा होने से भूमि विवाद कम होंगे और लोगों को राहत मिलेगी.

 

 

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