Ranchi: इस्कॉन तीन दिवसीय रथयात्रा उत्सव का तैयारी कर रही है. यह यात्रा 19-23 जुलाई तक चलेगी. इससे पहले ही इसका विरोध शुरू हो गई है. शनिवार को जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष सह प्रथम सेवक ने इस रथ यात्रा का विरोध किया है और लोगों से इस उत्सव का बहिष्कार करने की अपील की है. इस मौके पर प्रथम सेवक शुधांशु नाथ शाहदेव ने बताया कि जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति इस्कॉन के धार्मिक मान्यता के विरुद्ध है और देश के विदेशी परंपरा के अनुरूप है. इसलिए इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं.
उन्होंने सभी धर्म प्रेमियों से इसका बहिष्कार करने की अपील भी की है, क्योंकि प्रत्येक वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आषाढ़ की द्वितीय तारीख को निकाली जाती है. यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो हिन्दुओं के पवित्र धाम पूरी से समस्त विश्व में संचालित है.
रांची में यह परंपरा नागवंशी साम्राज्य के द्वारा चालू की गयी है. इसे वर्ष 1691 में नागवंशी राजा ठाकुर एनीनाथ शाहदेव ने पूरी के तर्ज मानते हैं और जगन्नाथपुर में पहाड़ी के ऊपर अपने कुल देवता भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर का निर्माण भी किया. पूरी में समुद्र है, जो रांची में संभव नहीं है. इसलिए उन्होंने मंदिर के दक्षिण की और समुद्र के स्थान पर विशाल तालाब का निर्माण भी करवाया था, ताकि मंदिर में भक्तों को पूरी जैसी अनुभूति मिल सके.
जिस तरह आदि शंकराचार्य के समय से आषाढ़ की द्वितीय तिथि को रथ यात्रा निकाली जाती है, उसी प्रकार ठाकुर साहब और उनके साम्राज्य के नागरिकों द्वारा 1691 से ही भगवान को रथ में बैठा कर मौसी बाड़ी श्रद्धा पूर्वक ले जाया जाता है. उसके बाद 9 दिनों के वहां के प्रवास के बाद भगवान पुन: अपने स्थान पर रथ में बैठकर वापस आते हैं.
विदेशी संस्कृति के अनुयायी इस्कॉन वाले हिन्दू परंपरा के विरुद्ध -शुधांशुनाथ शाहदेव
प्रथम सेवक ने कहा कि विदेशी संस्कृति के अनुयायी इस्कॉन है. ये लोग हिन्दू परंपरा के विरुद्ध हैं. वे अपने हिसाब से पंचमी तिथि को रथयात्रा उत्सव मना रहे हैं. तीनों विग्रहों को एक गाड़ी में बैठायेंगे. जिसको रथ का नाम दिया जा रहा है, यह परम्परा के अनुसार बना भी नहीं है. इसमें भगवान के स्वरुप को बैठाकर रथ यात्रा निकाली जाएगी. रथ का समापन एक अपार्टमेंट के बाहर होगा, जो विचित्र है.
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