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प्रेमसंस मोटर पर ग्राहकों से 3600 करोड़ के घोटाले का आरोप! कहां से आया यह आंकड़ा! क्या है मामला

अधिवक्ता विवेक आर्या ने चुटिया थाने में दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में प्रेमसंस मोटर पर ग्राहकों से प्रति कार 1.20 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया है. विवेक ने थाने में दर्ज प्राथमिकी में कंपनी पर ग्राहकों से सालाना 3600 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख किया है. मामला कोर्ट में है. लेकिन शहर के कारोबारियों के बीच इसकी चर्चा है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर प्रेमसंस मोटर पर किस तरह से ठगी करने का आरोप है?
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  • -  सेल्स मैनेजर शैलेश कुमार, लिंगराज पट्टाजोशी, प्रेमसंस मोटर के निदेशक पुनीत पोद्दार व अवध पोद्दार हैं अभियुक्त.
  • - ठगी के मामले में आरोपी प्रेमसंस के निदेशकों सहित अन्य की अग्रिम जमानत पर 13 को सुनवाई.

Ranchi: अधिवक्ता विवेक आर्या ने चुटिया थाने में दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में प्रेमसंस मोटर पर ग्राहकों से प्रति कार 1.20 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया है. विवेक ने थाने में दर्ज प्राथमिकी में कंपनी पर ग्राहकों से सालाना 3600 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख किया है. मामला कोर्ट में है. लेकिन शहर के कारोबारियों के बीच इसकी चर्चा है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर प्रेमसंस मोटर पर किस तरह से ठगी करने का आरोप है?

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प्रेमसंस मोटर के निदेशक पुनीत पोद्दार


कथित ठगी के तरीके को समझने के लिए सबसे पहले प्राथमिकी को समझना जरूरी है. अधिवक्ता विवेक द्वारा 26 अप्रैल 2025 को दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में नेक्सा शोरूम के सेल्स मैनेजर शैलेश कुमार, लिंगराज पट्टाजोशी के अलावा प्रेमसंस मोटर के निदेशक पुनीत पोद्दार और अवध पोद्दार को अभियुक्त बनाया गया है. अभियुक्तों की अग्रिम जमानत पर सिविल कोर्ट में 13 जुलाई को सुनवाई की तिथि निर्धारित है. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभियुक्तों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक नहीं लगायी थी.

 

विवेक द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में यह कहा गया है कि वह प्रेमसंस मोटर के नेक्सा शोरूम में अपने भाई दयानंद कुमार के नाम पर कार बुक करने गये थे. उन्होंने डेल्टा मॉडल की कार पसंद किया. उन्हें कार की कीमत 13,59,081 रुपये बतायी गयी. विवेक को पुरानी कार को बदलना था. पुरानी कार की कीमत 6.40 लाख रुपये आंकी गयी. एक्सचेंज बोनस के रूप में 90 हजार रुपये बतायी गयी. एक्सचेंज वैल्यू और पुरानी कार की कीमत को नयी कार की कीमत में घटाने पर उन्हें 6,29,091 रुपये देना था.


इसके बाद उनपर कंपनी के माध्यम से ही इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए दबाव बनाया गया. उन्होंने कुल 3,33,599 (33,599 और 3,00000) रुपये कंपनी में जमा कराया. 


प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनकी पुरानी कार के लिए तय की गयी 6.40 लाख रुपये में से 10 हजार रुपये एडजस्ट नहीं किया जा रहा था. विवाद के इस मुद्दे पर बातचीत चल ही रही थी कि कंपनी ने उनकी अनुमति के बिना ही कार का रजिस्ट्रेशन करा दिया. इसकी जानकारी उन्हें बाद में मिली. 18 अप्रैल 2025 को वह कार की डिलेवरी लेने गये. उस वक्त उनसे 1.70 लाख रुपये जमा कराया गया.

 
इसके बाद उन्होंने अपने द्वारा जमा कराये गये पैसों का पूरा बिल मांगा. लेकिन कंपनी ने उन्हें बिल नहीं दिया. बिल के नाम पर रात के आठ बजे तक बैठाये रखा. इसके बाद उन्हें पूरा डिटेल मेल पर भेजने की बात कही गयी. लेकिन दूसरे दिन उन्हें मेल कर कार के सिलसिले में किये गये लेन-देन को रद्द करने की जानकारी दी गयी. 


विवेक ने कंपनी लेन-देन रद्द करने के बाद कंपनी द्वारा दिये गये बिल और लेन-देन के हिसाब को देखकर इस बात की गणना की कि उनसे 1.20 लाख रुपये ज्यादा लिया गया. इस तरह विवेक ने कंपनी की सालाना बिक्री के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि कंपनी सालाना 3600 करोड़ रुपये का घोटाला कर लोगों के साथ ठगी करती है.


इस प्रकरण में प्रेमसंस मोटर प्रबंधन का पक्ष लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका. उनका पक्ष मिलने पर खबर को अपडेट किया जायेगा.

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