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PLFI सुप्रीमो दिनेश गोप व पूरण तिवारी को मार्च में एम्स दिल्ली भेजने की तैयारी

Sanjeet Yadav 

Ranchi : पलामू सेंट्रल जेल में बंद प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई (पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया) के सुप्रीमो दिनेश गोप और हत्या के मामले में सजायाफ्ता बंदी पूरण तिवारी को इलाज के लिए अगले महीने मार्च में नई दिल्ली स्थित एम्स दिल्ली भेजे जाने की तैयारी चल रही है.

 

दोनों बंदियों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने मेडिकल रेफरल की प्रक्रिया पूरी कर ली है. सुरक्षा एजेंसियों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की जा रही है.

 

कड़ी सुरक्षा में होगा स्थानांतरण

सूत्रों के अनुसार, पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप को दिल्ली ले जाने के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी. उन्हें करीब 10 से अधिक सशस्त्र पुलिस जवानों और अधिकारियों की निगरानी में पलामू सेंट्रल जेल से दिल्ली रवाना किया जाएगा. सुरक्षा के मद्देनजर यात्रा मार्ग, ठहराव स्थल और अस्पताल परिसर में भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी.

 

दिनेश गोप झारखंड में सक्रिय रहे उग्रवादी संगठन के शीर्ष नेता माने जाते रहे हैं. उनके खिलाफ राज्य के विभिन्न जिलों में रंगदारी, अपहरण, धमकी और अन्य आपराधिक मामलों के कई केस दर्ज रहे हैं.

 

ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं. पुलिस का मानना है कि बंदी की हाई-प्रोफाइल पृष्ठभूमि को देखते हुए एस्कॉर्ट टीम में प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों की तैनाती की जाएगी.

 

स्वास्थ्य कारणों से लिया गया निर्णय

जेल सूत्रों का कहना है कि दिनेश गोप की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही है. स्थानीय स्तर पर चिकित्सकीय जांच और उपचार के बाद विशेषज्ञ परामर्श की आवश्यकता महसूस की गई. इसके बाद मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में दिखाने का निर्णय लिया गया.

 

इसी तरह हत्या के मामले में सजायाफ्ता पूरण तिवारी की भी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए रेफर किया गया है. जानकारी के अनुसार, पूरण तिवारी को 27 मार्च को एम्स दिल्ली भेजा जाएगा.

 

उनके लिए भी पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे, हालांकि सुरक्षा स्तर दिनेश गोप की तुलना में अलग हो सकता है. हालांकि अंतिम निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

 

एम्स दिल्ली में इलाज के दौरान भी दोनों बंदियों की सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस और झारखंड पुलिस के बीच समन्वय रहेगा. अस्पताल प्रशासन को भी पहले से सूचना दे दी  जाएगी, ताकि आवश्यक चिकित्सकीय जांच और परामर्श समय पर हो सके.

 

हाई-प्रोफाइल कैदी होने के कारण विशेष सतर्कता

दिनेश गोप की पहचान एक समय झारखंड में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों के प्रमुख चेहरे के रूप में रही है. उनके संगठन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं. ऐसे में उन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एस्कॉर्ट मूवमेंट को गोपनीय रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं.

 

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई-प्रोफाइल बंदियों को चिकित्सा उपचार के लिए बाहर ले जाते समय अक्सर सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता है. इसलिए मूवमेंट की जानकारी सीमित अधिकारियों तक ही रखी जाती है. इसके अलावा, अस्पताल परिसर में भी भीड़ नियंत्रण और मीडिया प्रबंधन को लेकर दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं.


पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि इलाज के दौरान सभी कानूनी औपचारिकताओं और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा. बंदियों को हथकड़ी और सुरक्षा घेरे में ही अस्पताल ले जाया जाएगा तथा इलाज के दौरान भी सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे.

 

कानून व्यवस्था पर नजर

पलामू और आसपास के जिलों में पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है.


स्थानीय खुफिया इकाइयों को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत मिल सके. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि संवेदनशील मामलों में अतिरिक्त सावधानी ही सबसे बेहतर विकल्प होता है.

 

परिजनों को दी गई सूचना

सूत्रों के मुताबिक, दोनों बंदियों के परिजनों को भी प्रस्तावित इलाज और रेफरल की जानकारी दे दी गई है. नियमानुसार, उपचार से संबंधित प्रक्रिया और तिथियों की जानकारी साझा की गई है.

 

हालांकि सुरक्षा कारणों से सटीक यात्रा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल जांच पूरी होने के बाद ही आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय होगी.

 

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