Kolkata : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज शनिवार को 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पहुंचीं. इसके बाद वे बागडोगरा के गोशाईपुर में आयोजित संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई.
कॉन्फ्रेंस की चीफ गेस्ट राष्ट्रपति ने कहा कि 2003 को संथाल समुदाय के इतिहास में हमेशा याद रखा जायेगा. क्योंकि उस साल, संथाल भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था.
The events in West Bengal today point to a complete collapse of the constitutional framework under the Mamata Banerjee government.
— Amit Malviya (@amitmalviya) March 7, 2026
In a rare and unprecedented development, the Hon’ble President of India, Smt Droupadi Murmu, openly expressed displeasure over the lack of… pic.twitter.com/ZMiRwZkVbJ
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर संथाल भाषा में ओल चिकी स्क्रिप्ट में लिखा गया भारत का संविधान जारी किया गया था.
उन्होंने कहा कि यह संथाल समुदाय के लिए गर्व की बात है कि हमारे पूर्वज तिलका मांझी ने लगभग 240 साल पहले शोषण के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया था.. उनके बगावत के 60 साल बाद, बहादुर सिदो-कान्हू और चांद-भैरव ने बहादुर फूलो-झानो के साथ मिलकर 1855 में संथाल हुल का नेतृत्व किया था.
कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति सिलीगुड़ी उपमंडल के बिधाननगर पहुंचीं. जहां उन्होंने एक सभा को संबोधित किया. अहम बात यह रही कि यहां उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा, उन्हें(ममता) मेरे कार्यक्रम में होना चाहिए था.
आरोप है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया. प्रदेश सरकार के किसी भी रिप्रेजेंटेटिव ने राष्ट्रपति को रिसीव नहीं किया.राष्ट्रपति यहीं नहीं रुकी. कहा कि मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है.
राष्ट्रपति ने कहा कि ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं, शायद वह मुझसे नाराज हैं. इसीलिए मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहां (गोशाईपुर) जाना पड़ा. कोई बात नहीं, हालांकि कहा कि मैं इस बात पर गुस्सा या नाराज नहीं हूं.
मामला यह है कि संथाल कॉन्फ्रेंस का आयोजन सिलीगुड़ी के बिधाननगर उपमंडल में होना था, लेकिन पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिये जाने के कारण कार्यक्रम स्थल बदल कर बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद बिधाननगर पहुंची थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहां ममता बनर्जी के प्रति नाराजगी जताई. कहा कि कॉन्फ्रेंस के लिए दिया गया स्थान(गोशाईपुर) काफी छोटा था, जिस वजह से बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाये.
द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वहां पांच हजार लोगों के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं थी. विधाननगर मैदान का आकार देखकर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, विधाननगर का मैदान काफी बड़ा है. यहां लाखों लोगों के आने की क्षमता है.
इस क्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का आयोजन इस बड़े मैदान में किया जाता तो लगभग पांच लाख लोग इसमें शामिल हो सकते थे. उन्होंने पूछा कि राज्य में जब इतनी बड़ी जगह उपलब्ध थी तो फिर कॉन्फ्रेंस के लिए इतनी छोटी जगह क्यों मुहैया कराई गयी.
यहां राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा, ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन जैसी हैं, कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ममता उनसे नाराज़ हैं, लेकिन इसके बावजूद समझ नहीं आता कि इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लिए इतनी छोटी जगह क्यों दी गयी.
भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय ने ममता बनर्जी पर हमलावर होते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में हुई आज की घटनाएं ममता बनर्जी सरकार के तहत संवैधानिक ढांचे के पूर्ण पतन की ओर इशारा करती है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा,राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिलीगुड़ी की अपनी यात्रा के दौरान तैयारी और प्रोटोकॉल की कमी पर खुले तौर पर नाराजगी व्यक्त की है
इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय संथाली कॉन्क्लेव की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जहां राष्ट्रपति स्वयं मुख्य अतिथि थी
अमित मालवीय ने कहा कि जब कोई राज्य सरकार भारत के राष्ट्रपति के पद की गरिमा की अवहेलना करने लगती है, तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि संवैधानिक औचित्य और शासन के टूटने को भी दर्शाता है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment