- पड़ोसी राज्य ओडिशा, पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से पीछे
- 2.43 लाख मकान स्वीकृत, 1.66 लाख ही पूरे
Ranchi : झारखंड में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत कार्य की रफ्तार काफी धीमी है. मकानों को पूरा करने के मामले में राज्य अभी भी कई राज्यों से पीछे चल रहा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 2 लाख 43 हजार 368 मकान स्वीकृत किए गए हैं. इनमें से 2 लाख 10 हजार 752 मकानों पर काम शुरू हो चुका है. इनमें से केवल 1 लाख 66 हजार 291 मकान ही निर्मित हो पाए हैं. राज्य का कंप्लीशन रेट केवल 68 प्रतिशत है.
तुलनात्मक रूप से देखें तो झारखंड कई राज्यों से पीछे है, जहां मकान पूरा होने की गति इससे अधिक है. गुजरात में लगभग 89 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 82, उत्तर प्रदेश में 80 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में करीब 88, छत्तीसगढ़ में 79 महाराष्ट्र में 78 और ओडिशा में 73 प्रतिशत मकान पूरे हो चुके हैं. राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी कंप्लीशन रेट झारखंड से बेहतर है. इन राज्यों की तुलना में झारखंड में प्रोजेक्ट पूरा होने की रफ्तार धीमी है.
बिहार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा से स्थिति बेहतर
हालांकि झारखंड की स्थिति पूरी तरह कमजोर भी नहीं है. कई राज्यों के मुकाबले इसका प्रदर्शन बेहतर भी है. बिहार में करीब 45 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 57 फीसदी मकान ही पूरे हो पाए हैं. हरियाणा भी झारखंड से पीछे है, यहां केवल 55 फीसदी मकान निर्मित हुए हैं.
जमीन पर उतर चुके 86 प्रतिशत कार्य
राज्य में ग्राउंडिंग यानी काम शुरू करने की रफ्तार काफी अच्छी है और 86 प्रतिशत से ज्यादा प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुके हैं. इसके बावजूद कंप्लीशन में अंतर बना हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि अंतिम चरण में काम की गति धीमी पड़ रही है.
कुल मिलाकर झारखंड में योजना का शुरुआती क्रियान्वयन मजबूत है, लेकिन मकानों को समय पर पूरा करने के लिए अभी और तेजी लाने की जरूरत है, ताकि झारखंड भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सके.
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