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लो-ग्रेड आयरन ओर को बढ़ावा : नए ASP नियम से झारखंड में खनन को मिलेगा बड़ा बूस्ट

  • उच्च गुणवत्ता वाले आयरन ओर पर दबाव होगा कम
  • राज्य में खनन गतिविधियां होंगी तेज

Ranchi : केंद्र सरकार ने आयरन ओर के लो-ग्रेड भंडारों के बेहतर उपयोग के लिए नई व्यवस्था लागू की है. इसके तहत 45% से कम आयरन कंटेंट वाले अयस्क के लिए अलग औसत बिक्री मूल्य (ASP) तय किया गया है. पहले इस श्रेणी के अयस्क के लिए स्पष्ट मूल्य निर्धारण नहीं होने से खनन कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था. अब इसके जरिए झारखंड में खनन को और बड़ा बूस्ट मिलने वाला है.

 

सरकार ने 45–51% आयरन वाले अयस्क की कीमत को आधार माना है. नई व्यवस्था के अनुसार 35% से 45% ग्रेड वाले अयस्क का औसत बिक्री मूल्य 45–51% ग्रेड का औसत बिक्री मूल्य का 75% होगा. वहीं, 35% से कम ग्रेड वाले अयस्क के लिए यह 50% तय किया गया है.

 

इसका मतलब है कि कम गुणवत्ता वाले अयस्क पर अब कम रॉयल्टी लगेगी, जिससे कंपनियों के लिए उसका खनन और उपयोग करना आसान और सस्ता हो जाएगा.

 

कच्चे माल की बढ़ेगी उपलब्धता 

पहले ज्यादा रॉयल्टी और कम कीमत के कारण कंपनियां ऐसे अयस्क को निकालने से बचती थीं, लेकिन अब कम एएसपी तय होने से लागत घटेगी. उच्च गुणवत्ता वाले आयरन ओर पर दबाव भी कम पड़ेगा और स्टील उद्योग को कच्चे माल की बेहतर उपलब्धता मिल सकेगी.

 

अब तक होता था सीमित उपयोग 

खनिज संपन्न झारखंड में लो-ग्रेड आयरन ओर के बड़े भंडार मौजूद हैं, जिनका अब तक सीमित उपयोग ही हो पाता था. लो-ग्रेड आयरन ओर के उपयोग बढ़ने से खनन गतिविधियां तेज होंगी. संसाधनों के दोहन की संभावनाएं बढ़ेंगी और इससे जुड़ी सहायक क्षेत्रों को बल मिलेगा.

 

राजस्व और रोजगार में होगी बढ़ोतरी

इस फैसले का असर राज्य के राजस्व और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखेगा. रॉयल्टी और अन्य शुल्क के जरिए सरकार की आय में बढ़ोतरी हो सकती है. साथ ही, खनन और उससे जुड़े परिवहन, प्रोसेसिंग व अन्य कार्यों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी.

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