New Delhi : देश के स्कूलों में विशेष जरूरत वाले बच्चों (CwSN) को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और उनकी तैनाती के मानक तय किए हैं. इसके तहत प्राथमिक स्तर पर हर 10 विशेष जरूरत वाले बच्चों पर एक विशेष शिक्षक और उच्च प्राथमिक स्तर पर हर 15 बच्चों पर एक विशेष शिक्षक का प्रावधान किया गया है.
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शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है. देश के अधिकांश स्कूलों का प्रशासन संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिम्मे है. विशेष शिक्षकों की नियुक्ति और उनकी सेवा से जुड़े मामलों का अधिकार भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास है.
केंद्र सरकार समग्र शिक्षा योजना के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता देती है. इस योजना के तहत प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है.
योजना के तहत विशेष शिक्षकों को जरूरत के अनुसार ब्लॉक या क्लस्टर स्तर पर तैनात किया जा सकता है. वे एक ही स्कूल तक सीमित रहने के बजाय उन स्कूलों में जाकर भी बच्चों को पढ़ाने और सहायता देने का काम कर सकते हैं, जहां विशेष जरूरत वाले बच्चे नामांकित हैं.
मंत्रालय ने बताया कि समग्र शिक्षा और पीएम श्री योजना के तहत स्कूलों में समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. इसके अलावा, प्रत्येक ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) में विशेष जरूरत वाले बच्चों की सहायता के लिए दो रिसोर्स पर्सन उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है.
विशेष शिक्षकों के लिए छात्र-शिक्षक अनुपात संबंधी मानक शिक्षा विभाग की अधिसूचना संख्या एसओ 4586 (ई), दिनांक 21 सितंबर 2022 के तहत जारी किए गए थे. यह अधिसूचना 29 सितंबर 2022 को प्रकाशित हुई थी.
मंत्रालय के मुताबिक, यूडीआईएसई+ 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, देश के 1.17 लाख स्कूलों में समर्पित विशेष शिक्षक उपलब्ध हैं. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष जरूरत वाले बच्चों के नामांकन और विशेष शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या का अलग-अलग विवरण भी मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत किया गया है.
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