Ranchi : झारखंड की राजनीति में बुलेट प्रूफ वाहनों की खरीद और उपयोग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं. मरांडी ने अपने पत्र में लिखा है कि गृह विभाग द्वारा वर्ष 2024 के अंतिम महीने में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य अति विशिष्ट व्यक्तियों के सुरक्षा की दृष्टि से 17 बुलेट प्रूफ फॉर्च्यूनर वाहन खरीदे गए थे.
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि इन 17 वाहनों में से 3 वाहन मुख्यमंत्री के उपयोग के लिए, 2 वाहन राजभवन (लोकभवन) के लिए, जबकि शेष 12 वाहन HQRT (क्विक रिस्पॉन्स टीम) में रखे गए हैं. मरांडी के अनुसार, HQRT में रखी गई गाड़ियों में से केवल 3–4 का ही उपयोग हो रहा है, जबकि बाकी वाहन लंबे समय से बिना उपयोग के खड़े हैं.
खड़े-खड़े खराब हो रहे वाहन
पत्र में कहा गया है कि यदि नए वाहनों का लंबे समय तक उपयोग नहीं किया जाए, तो वे खराब हो जाते हैं और बाद में उपयोग के लायक नहीं रहते. ऐसे में बिना जरूरत गाड़ियों की खरीद जनता के पैसे की बर्बादी है. मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिए गए बुलेट प्रूफ वाहन 10–12 वर्ष पुराने हैं ये वाहन करीब 2 लाख किलोमीटर चल चुके हैं, बार-बार खराब होने के कारण यात्रा के दौरान परेशानी होती है.
मरांडी ने सुझाव दिया कि जो नई बुलेट प्रूफ गाड़ियां उपयोग में नहीं हैं, उन्हें खाली रखने के बजाय मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव, कैबिनेट सचिव को आवंटित कर दिया जाए, ताकि उनका नियमित उपयोग हो सके और वे खराब न हों.
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