Ranchi: स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाली फार्मेसी काउंसिल में नियमों की खुली अनदेखी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. 14 अक्टूबर 2024 को प्रशांत कुमार पाण्डेय को महज 6 माह के लिए अस्थायी तौर पर रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया गया था. नियम साफ कहते हैं कि इस अवधि के भीतर नियमित नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन 17 महीने बीत जाने के बाद भी पाण्डेय उसी कुर्सी पर जमे हुए हैं.
मामला इतना बढ़ा कि यह मुद्दा विधानसभा तक पहुंचा, जहां विधायक सरयू राय ने इसे जोरदार तरीके से उठाया. बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
नियमों के खिलाफ पद पर बने रहने का आरोप
पाण्डेय पर आरोप है कि वे नियमों के विरुद्ध पद पर बने हुए हैं और विभागीय प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ कई गंभीर आरोपों की जांच भी की गई, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी.
जालसाजी और फर्जी रजिस्ट्रेशन का आरोप
रजिस्ट्रार प्रशांत कुमार पाण्डेय पर जालसाजी के गंभीर आरोप लगे हैं. सहायक निदेशक (औषधि) स्तर से उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा तक की गई थी. जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन नंबर JH/00083 और JH/20564/83 का अदल-बदल कर दोहरी नौकरी छिपाने की कोशिश की. इतना ही नहीं त्यागपत्र के बाद भी एक रजिस्ट्रेशन नंबर को कथित तौर पर धोखाधड़ी से फिर सक्रिय किया गया.
जांच अधिकारियों ने उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को भी संदेहास्पद बताया है. बिना वैध डिप्लोमा या डिग्री के रजिस्ट्रेशन को अवैध करार देने की बात सामने आई है, जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है.
विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
17 महीने गुजरने के बाद भी रजिस्ट्रार पद पर नियमित नियुक्ति नहीं होना और आरोपों के बावजूद कार्रवाई न होना, विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है. स्वास्थ्य विभाग, जो खुद को “तेजतर्रार” नेतृत्व वाला बताता है, उसी के अंदर इस तरह की स्थिति सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रही है.
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