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सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले डीजीपी की नियुक्ति पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 7 को

Ranchi News :   मामला वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और राज्य सरकार की ओर से बनाए गए नियमों से जुड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि डीजीपी को उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले पदभार सौंपकर दो साल का कार्यकाल देना सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के दिशा-निर्देशों और संघ लोक सेवा आयोग के नियमों के अनुरूप है या नहीं, इस पर सवाल उठे हैं.
 
डीजीपी तदाशा मिश्रा (फाइल फोटो)

 Ranchi News :  झारखंड के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण रिपोर्ट दाखिल की गयी है. इस मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित है.

 

 सेवानिवृत्ति से पहले डीजीपी की नियुक्ति पर उठे सवाल

मामला वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और राज्य सरकार की ओर से बनाए गए नियमों से जुड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि डीजीपी को उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले पदभार सौंपकर दो साल का कार्यकाल देना सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के दिशा-निर्देशों और संघ लोक सेवा आयोग के नियमों के अनुरूप है या नहीं, इस पर सवाल उठे हैं. एमिकस क्यूरी ने रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों और डीजीपी नियुक्ति से संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए मामले के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय दी है.

 

 

नए नियमों के बाद शुरू हुआ विवाद

झारखंड सरकार ने 8 जनवरी 2025 को डीजीपी के चयन और नियुक्ति से संबंधित नए नियम अधिसूचित किए थे. इसके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी. याचिका में आरोप लगाया गया कि नए नियमों से प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय दिशा-निर्देश प्रभावित होते हैं.

 

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2025 को मामले में आदेश पारित किया. बाद में राज्य सरकार ने नियमों के नियम 5(सी) में संशोधन किया. संशोधन के तुरंत बाद 30 दिसंबर 2025 को नई नियुक्ति की गयी, जिसे लेकर भी अदालत में चुनौती दी गयी है.

 

 नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने यूपीएससी को नाम भेजे बिना संशोधित नियमों के आधार पर डीजीपी की नियुक्ति की. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों में डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी की प्रक्रिया का पालन किए जाने की बात कही गयी है.

 

एमिकस क्यूरी ने रिपोर्ट में वर्तमान डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े तथ्यों पर भी टिप्पणी की है. रिपोर्ट के अनुसार डीजीपी के नाम पर विचार करते समय ऐसे अधिकारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए जिनकी सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय बचा हो.

 

मामले की पिछली सुनवाई 2 सितंबर को हुई थी. उस दौरान एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई को 7 सितंबर तक टाल दिया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई होगी.

 

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