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राहुल गांधी ने असम के प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि दी, परिजनों से मिले

असम सरकार ने मौत के कारणों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है. 23 सितंबर को राजकीय सम्मान के साथ जुबिन का अंतिम संस्कार किया गया था. जुबिन गर्ग की मृत्यु स पूरे प्रदेश में शोक व्याप्त हो गया था. लोगों ने गर्ग की मौत को संदिग्ध मानते हुए जांच कराने की मांग की थी.
 

Guwahati :  लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज शुक्रवार को असम के प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि देने गुवाहाटी पहुंचे. राहुल गांधी के असम पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया. इसके बाद राहुल गांधी ने गुवाहाटी के बाहरी इलाके सोनापुर में गर्ग के समाधि स्थल पर जाकर जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि दी. 

 

 

 

 

राहुल गांधी  शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए गायक के आवास पर भी गये और जुबिन गर्ग के परिजनों से मिले.  याद करें कि पिछले माह 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय जुबिन गर्ग की मृत्यु हो गयी थी.उनकी मौत को संदिग्ध मानते हुए असम सरकार ने मौत के कारणों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है.

 

23 सितंबर को राजकीय सम्मान के साथ जुबिन का अंतिम संस्कार किया गया था. जुबिन गर्ग की मृत्यु स पूरे प्रदेश में शोक व्याप्त हो गया था. लोगों ने गर्ग की मौत को संदिग्ध मानते हुए जांच कराने की मांग की थी. जांच के क्रम में कई लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं.

 

राहुल गांधी ने परिजनों से मुलाकात क बाद एक्स पर पोस्ट किया, जुबीन दा कंचनजंगा की तरह थे. ईमानदार, अडिग और खूबसूरत. भारत और असम ने न केवल एक कलाकार, बल्कि एक ऐसी महान आत्मा को खो दिया है जिसने अनगिनत दिलों को छुआ है.

 

राहुल गांधी ने लिखा कि जुबीन दा का परिवार और असम के लोग सच्चाई और न्याय के अलावा किसी और चीज़ के हक़दार नहीं हैं.  सरकार को एक त्वरित और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए. मैं उनके परिवार के दुःख में उनके साथ हूं और हर संभव तरीके से उन्हें अपना पूरा समर्थन देता हूं.

 


राहुल गांधी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, मैंने परिवार से कहा कि मैं बेहतर और खुशहाल परिस्थितियों में आना चाहता था. लिखा कि जब मैं 17 साल का था, तब मैं सिक्किम में पर्वतारोहण का कोर्स करने गया था.  हर दिन जब हम प्रशिक्षण के लिए जाते थे, तो मैं अपने सामने कंचनजंगा पर्वत को देखता था. मुझे उस पर्वत की सबसे अच्छी बात यह लगी कि वह ईमानदार, पारदर्शी, अडिग और सुंदर था. 

 

आज जब मैं आ रहा था, तो गौरव ने बताया कि ज़ुबीन जी ने कहा था कि वह कंचनजंगा हैं. यह सुन कर मुझे तुरंत एहसास हुआ कि वह कंचनजंगा हैं क्योंकि उनमें कंचनजंगा के गुण थे.  मैंने ज़ुबीन जी के पिता से कहा कि उनकी बुद्धिमत्ता ने उन्हें बनाया.  इस अद्भुत राज्य को एक आवाज़ दी. मैंने परिवार से बात की,  उन्होंने मुझसे केवल एक ही बात कही,  हमने अपना ज़ुबीन खो दिया है और हम बस यही चाहते हैं कि सच्चाई सामने आये.

 

 

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