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राहुल गांधी ने ओम बिरला को पत्र लिखा, लगाया आरोप, सरकार के इशारे पर मुझे लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया

राहुल गांधी ने आज इस लेख को सत्यापित करते हुए सदन के पटल पर रखा था. राहुल गांधी ने इसका जिक्र पत्र में करते हुए लिखा कि सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आपने मुझे उस पत्रिका के लेख को सत्यापित करने का निर्देश दिया था, जिसका मैं उल्लेख करना चाहता था.
 

New Delhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज मंगलवार को अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उनके साथ संसद में भेदभाव होने की शिकायत की है. अपने पत्र में राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार(मोदी) के इशारे पर उन्हें सदन में बोलने से रोका गया है. राहुल ने कहा कि यह लोकतंत्र पर काला धब्बा है.

 

 
राहुल गांधी ने लिखा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेता प्रतिपक्ष सहित  प्रत्येक सदस्य को सदन में बोलने का अधिकार है,  लेकिन इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों को दरकिनार कर दिया जा रहा है.  


दरअसल  राहुल गांधी ने आज मंगलवारको सोमवार की तरह ही पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित प्रकाशित एक लेख हवाले से चीन का मुद्दा उठाने की कोशिश की,  लेकिन आसन ने इसकी अनुमति नहीं दी.  


राहुल गांधी ने आज इस लेख को सत्यापित करते हुए सदन के पटल पर रखा था. राहुल गांधी ने इसका जिक्र पत्र में करते हुए लिखा कि सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आपने मुझे उस पत्रिका के लेख को सत्यापित करने का निर्देश दिया था, जिसका मैं उल्लेख करना चाहता था. 
 

राहुल गांधी के अनुसार आज जब उन्होंने अपना भाषण फिर से शुरू किया, उस दस्तावेज को सत्यापित किया. राहुल गांधी ने याद दिलाया कि लंबे समय से यह परंपरा चली आ रही है कि  यदि कोई सदस्य सदन में किसी दस्तावेज़ का उल्लेख करना चाहता है, तो उसे पहले उसे सत्यापित करना होता है.


उसे सामग्री की ज़िम्मेदारी लेनी पड़ती है. इसके बाद अध्यक्ष  उस सदस्य को  दस्तावेज़ को उद्धृत करने या उसका संदर्भ देने की अनुमति प्रदान करते हैं.  राहुल गांधी ने ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा है कि आज लोकसभा में मुझे बोलने से रोकना इस परंपरा का उल्लंघन है, 


इससे यह आशंका भी पैदा हो रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर, नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मुझे जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है.  कांग्रेस नेता ने लिखा कि सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में लोकसभा अध्यक्ष की संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है कि वह हर सदस्य, विशेष रूप से विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करें. 

 

 

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