Ranchi: झारखंड विधानसभा में बजट की कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक राजेश कच्छप ने सरकार का समर्थन करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. अपने संबोधन में उन्होंने किसानों, जवानों और राज्य के विकास से जुड़े कई मुद्दे उठाए.
उन्होंने जय जवान जय किसान का जिक्र करते हुए कहा कि देश का किसान खून-पसीना बहाकर खेतों में मेहनत कर रहा है, लेकिन अग्निवीर योजना के जरिए जवानों के मनोबल को कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शहीद होने के बाद भी कई परिवारों को उचित मुआवजा और देखभाल नहीं मिल पाती. उन्होंने यह भी आशंका जताई कि कहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार और बड़े औद्योगिक घरानों के दबाव में किसानों को उनकी शर्तों पर खेती करने के लिए मजबूर न होना पड़े.
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राजेश कच्छप ने करीब 5000 करोड़ रुपये के कृषि बजट को किसानों के लिए राहत भरा कदम बताया. उन्होंने कहा कि झारखंड की मिट्टी और जलवायु खेती के लिए अनुकूल है. यहां महुआ, ला, जड़ी-बूटी, आम, अमरूद, धान, गेहूं, मक्का और सब्जियों की अच्छी पैदावार की संभावना है. उन्होंने मछली उत्पादन में राज्य की प्रगति पर भी संतोष जताया और भविष्य में निर्यात की संभावना बताई.
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भेड़, बकरी और मुर्गी पालन को व्यावसायिक रूप दिया जाना चाहिए. उनका सुझाव था कि किसान छोटे स्तर के बजाय बड़े स्तर पर पशुपालन करें ताकि उन्हें अधिक लाभ मिल सके. उन्होंने सरायकेला में 5000 लीटर क्षमता वाली डेयरी और रांची में 20 टन प्रतिदिन क्षमता वाले मिल्क पाउडर प्लांट का उल्लेख करते हुए सरकार के प्रयासों की सराहना की.
गौ तस्करी के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा और बजरंग दल पर आरोप लगाया कि इस नाम पर किसानों और व्यापारियों को डराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसान अब बाजार से बैल की जोड़ी खरीदने में भी डर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े मांस निर्यात से जुड़े लोग ही गाय के नाम पर राजनीति कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने विपक्ष पर धार्मिक नेताओं की बातों को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया.
महिला सशक्तिकरण पर उन्होंने कहा कि JSLPS और स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को कृषि से जोड़ने का प्रयास सराहनीय है. उन्होंने 1932 के खतियान को लागू करने की बात दोहराई और कहा कि उनकी सरकार श्रमिकों को 32 रुपये की दर से लाभ देगी, जबकि पहले यह दर बहुत कम थी.
अंत में उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि पठारी इलाकों में नए डोभा खोदने के बजाय पुराने छोटे पोखरों और जलाशयों का गहरीकरण और सौंदर्यीकरण किया जाए. उन्होंने फूलों की खेती, मधुमक्खी पालन, हाईटेक पार्क और लाह की खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी प्रशंसा की.
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