- जब खर्च नहीं करना तो 5000 करोड़ का बजट दिखाने का क्या मतलब
Ranchi : झारखंड विधानसभा बजट सत्र में हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के कृषि एवं संबद्ध प्रक्षेत्र के बजट प्रस्ताव पर बोलते हुए सरकार को कई मुद्दों पर घेरा. उन्होंने राज्य के 1,58,560 करोड़ के बजट को आंकड़ों का खेल बताया और कहा कि सिर्फ बड़ी राशि दिखाने से विकास नहीं होता.
कृषि बजट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में कृषि विभाग के लिए 1055 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन उसमें से केवल 362 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए और करीब 500 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए गए.
उन्होंने बताया कि योजना मद में कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के लिए आवंटित 4000 करोड़ रुपये में से 31 जनवरी 2025 तक सिर्फ 1443 करोड़ रुपये यानी लगभग 36 प्रतिशत राशि ही खर्च हो सकी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब खर्च ही नहीं करना है तो 5000 करोड़ रुपये का बजट दिखाने का क्या मतलब है.
विधायक ने किसानों की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान 3200 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने का वादा किया गया था, जिसे पूरा नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि 2400 रुपये प्रति क्विंटल का वादा भी पूरा नहीं किया. ऐसे में किसान 1500 से 1600 रुपये में धान बेचने को मजबूर हैं.
राज्य में 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य रखा गया, लेकिन खरीद की प्रक्रिया धीमी है. मिल टैगिंग नहीं होने और गोदाम भरे होने के कारण कई जगहों पर धान खेतों में पड़ा है. नगरी प्रखंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 8000 क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 15 फरवरी 2026 तक सिर्फ 1700 क्विंटल धान की ही खरीद हो सकी है.
नवीन जायसवाल ने यह भी कहा कि अधिकारी फंड की कमी की बात करते हैं, जबकि वित्त मंत्री धन की कमी नहीं होने का दावा करते हैं. मिलेट मिशन योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक लाख किसानों को अनुदान देने का लक्ष्य था. 64,692 आवेदन आने के बावजूद अब तक किसी किसान को लाभ नहीं मिला है.
पशुपालन विभाग पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कोविड के समय पशु खरीद के लिए लोगों से पैसे जमा कराए गए. लेकिन न पशु मिले और न ही पैसा वापस हुआ. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य से पलायन नहीं रुका है और मार्केटिंग बोर्ड व बाजार समिति में 910 स्वीकृत पदों में से 795 पद खाली पड़े हैं.
नवीन जायसवाल ने एयर एंबुलेंस सेवा में गड़बड़ी का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय में रेड बर्ड नाम की निजी कंपनी का बोर्ड लगा है. उनका दावा है कि जहां सब्सिडी वाली सेवा कम दर पर उपलब्ध होनी चाहिए, वहां निजी कंपनी के जरिए 8.30 लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं.
हाल में हुए एयर एम्बुलेंस हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी सेवा होने के बावजूद निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए देरी का बहाना बनाया जाता है.
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