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रजरप्पा मंदिर केस : DC ने हाईकोर्ट को बताया, हटाए गए वेंडरों को मंदिर के निकट करेंगे पुनर्वासित

  • सचिव पर्यटन, जल संसाधन सचिव, डीसी रामगढ़  हुए हाजिर
  • CSR फंड से मंदिर के निकट बनेगा श्रद्धालुओं के लिए अस्पताल
  • 50 लाख खर्च कर भैरवी नदी के डेंजर जोन की बेरिकेटिंग के लिए बनाया गया है डीपीआर
  • भैरवी नदी के डेंजर जोन में बैरिकेडिंग इस वर्ष बरसात शुरू होने के पहले बनाया जाए
  • मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए भी बन रहा है डीपीआर

Ranchi: रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा मंदिर) परिसर के सौंदर्यीकरण से संबंधित मामले में दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट में हाजिर डीसी रामगढ़ ने बताया कि मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर से हटाए गए वेंडरों को मंदिर के निकट अस्थायी रूप से  पुनर्वासित किया जाएगा. 254 दुकानदारों को हटाया गया है. उन्हें मंदिर के निकट पुनर्वासित करने के लिए जगह चिन्हित कर लिया गया है.

 
जिसपर कोर्ट ने रामगढ़ डीसी से मौखिक कहा कि मंदिर के निकट दुकानदारों के पुनर्वास के लिए स्थाई रूप से निर्माण किया जाए. उन्हें दुकान बनाकर दिया जाए और निर्धारित रेंट लिया जाए. इससे वहां के दुकानदारों को भी काफी राहत होगी और सरकार को भी राजस्व मिलेगा. जल संसाधन सचिव की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 50 लाख खर्च पर भैरवी नदी के डेंजर जोन की बेरिकेटिंग के लिए डीपीआर बनाया गया है. 


जिसपर कोर्ट ने इस डीपीआर पर सीसीएल को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह में CSR फंड से इसका निर्माण कराने पर निर्णय ले. भैरवी नदी के डेंजर जोन में बैरिकेडिंग इस वर्ष बरसात शुरू होने के पहले बनाया जाए. कोर्ट ने CCL को अपने CSR फंड से मंदिर के निकट श्रद्धालुओं के लिए अस्पताल बनाने के संदर्भ में भी निर्णय लेने को कहा. 


सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए डीपीआर भी बन रहा है, चड्ढा एवं एसोसिएट यह काम कर रही है. कोर्ट ने अगले सुनवाई में रांची डीसी को फिर हाजिर रहने का निर्देश दिया है और उनसे स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. अगली सुनवाई 11 मई को होगी. प्रार्थी की ओर  से अधिवक्ता भारत कुमार ने पक्ष रखा. वहीं सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन,  अधिवक्ता ओमिया अनुसा ने पक्ष रखा. 


आज मामले में कोर्ट के आदेश के आलोक में सरकार के सचिव पर्यटन, जल संसाधन सचिव और डीसी रामगढ़ हाजिर हुए. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई में कोर्ट ने सचिव पर्यटन से कहा था कि वह मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर का दौरा करें और वहां के सौंदरीकरण को लेकर एक प्रपोजल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें.  


दरअसल  हाईकोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में कहा था कि वर्ष 2023 में एक जनहित याचिका में मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के संदर्भ में आदेश पारित किए थे. मां छिन्नमस्तिका मंदिर के निकट स्थित भैरवी नदी तट पर सुरक्षा के अभाव में कई लोगों की मौत हो रही है. ऐसे में हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन जरूरी है ताकि वहां सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके. 


बता दें कि प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल कर झारखंड हाईकोर्ट द्वारा एक जनहित याचिका में 11.08.2023 परित आदेश का अनुपालन कराने का आग्रह किया है. परित आदेश में हाईकोर्ट ने  झारखंड राज्य, पर्यटन विभाग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ जिला प्रशासन को दस अनिवार्य निर्देश जारी किए थे. इन निर्देशों में मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाटों का निर्माण, वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालयों की व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सीय सुविधाएं सुनिश्चित करना, अतिक्रमण हटाना, नदी का चौड़ीकरण आदि शामिल हैं.

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