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राज्यसभा चुनाव: हर वोट पर महागठबंधन की नजर, बुधवार को फिर सीएम आवास में जुटेंगे विधायक

मुख्यमंत्री आवास में मंगलवार को हुई महगठबंधन के विधायकों की बैठक में जानकारी देते सीएम हेमंत सोरेन.

Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. एक ओर भाजपा अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं सत्तारूढ़ महागठबंधन (झामुमो-कांग्रेस-राजद-वाम दल) भी अपने एक-एक वोट को सुरक्षित रखने में जुटा है. इसी कड़ी में बुधवार शाम मुख्यमंत्री आवास में महागठबंधन विधायकों की एक और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है.

 

सूत्रों के अनुसार बैठक में विधायकों को मतदान की पूरी प्रक्रिया का दोबारा प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी गलती या क्रॉस वोटिंग की संभावना को समाप्त किया जा सके. गठबंधन नेतृत्व इस बात को लेकर विशेष रूप से सतर्क है कि कोई भी वोट अमान्य न हो और दोनों उम्मीदवारों को निर्धारित समर्थन सुनिश्चित किया जा सके.

 

मंगलवार देर शाम मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक में महागठबंधन के अधिकतर विधायक शामिल हुए थे. बैठक में मतदान की प्रक्रिया, प्राथमिकता आधारित वोटिंग और चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. जो विधायक मंगलवार की बैठक में शामिल नहीं हो सके, उन्हें बुधवार को हर हाल में रांची पहुंचने का निर्देश दिया गया है.

 

उधर, भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं. नाथवानी को उम्मीद है कि उन्हें भाजपा के निर्धारित वोटों के अलावा कुछ अतिरिक्त समर्थन भी मिल सकता है. हालांकि महागठबंधन की बैठकों में जिस तरह एकजुटता का प्रदर्शन किया जा रहा है, उससे अतिरिक्त वोटों की संभावनाएं फिलहाल सीमित दिखाई दे रही हैं.

 

सूत्रों का कहना है कि महागठबंधन की दूसरी सीट के उम्मीदवार कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के लिए अतिरिक्त वोटों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी गठबंधन के कुछ वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है. यही कारण है कि चुनाव से पहले लगातार बैठकें और संपर्क अभियान जारी हैं.

 

दो सीटों के लिए कितने वोट चाहिए


झारखंड विधानसभा में वर्तमान सदस्य संख्या के आधार पर राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 28 प्रथम वरीयता मत की आवश्यकता मानी जा रही है. ऐसे में दो सीटें जीतने के लिए महागठबंधन को कुल 56 वोट सुनिश्चित करने होंगे.

 

महागठबंधन के पास झामुमो, कांग्रेस, राजद, माले व सहयोगी विधायकों को मिलाकर इतना संख्या बल मौजूद है कि वह दोनों सीटों जीत सकती है, हालांकि, दूसरी सीट पर जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं होने के कारण गठबंधन नेतृत्व कोई जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है. यही वजह है कि हर विधायक को मतदान प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और सभी को चुनाव तक रांची में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं.

 

 

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि महागठबंधन अपने सभी वोट सुरक्षित रखने में सफल रहता है तो कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और झामुमो के बैजनाथ राम की राह आसान हो सकती है. वहीं, भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी की जीत की संभावनाएं काफी हद तक अतिरिक्त वोटों के समीकरण पर निर्भर करेंगी.

 

राज्यसभा चुनाव से पहले जारी बैठकों और रणनीतिक कवायद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मुकाबला केवल संख्या बल का नहीं, बल्कि हर एक वोट के प्रबंधन और राजनीतिक संदेश का भी है.

 

 


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