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राज्यसभा चुनाव : कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा, झारखंडी कांग्रेसी व राजेश ठाकुर का पोस्ट

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने झारखंड से प्रणव झा को प्रत्याशी बनाया है. इसे लेकर झारखंड कांग्रेस के नेताओं के बीच चर्चा तेज है. कुछ नाराज हैं. कुछ इसलिए खुश हैं कि जो दौड़ में सबसे आगे थे, वह पीछे ढकेल दिए गए.
 

Ranchi : राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने झारखंड से प्रणव झा को प्रत्याशी बनाया है. इसे लेकर झारखंड कांग्रेस के नेताओं के बीच चर्चा तेज है. कुछ नाराज हैं. कुछ इसलिए खुश हैं कि जो दौड़ में सबसे आगे थे, वह पीछे ढकेल दिए गए.

 

जिनको कांग्रेस पार्टी से लेना-देना नहीं है, वो यह सवाल उठा रहे हैं कि कांग्रेस ने झारखंडी को दरकिनार कर बाहरी को टिकट दिया. कई तरह की बातें हैं.

 

सबसे पहली बात यह कि सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि प्रणव झा कौन हैं? यह दिलचस्प सवाल है. जो प्रणव झा को नहीं जानते, वो कांग्रेसी कितना हैं, यह समझना मुश्किल नहीं है. प्रणव झा का जन्म बोकारो में हुआ. वह बोकारो में ही पढ़े-लिखे. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय का रूख किया.

 

साल 1990 में वह कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़े. बाद में युवा कांग्रेस में आये. इसके बाद पार्टी के मीडिया प्रभारी रहे. अजय माकन के साथ भी काम किया. और आज की तारीख में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हैं और पार्टी में राष्ट्रीय सचिव हैं. ये तो हुआ प्रणव झा के बारे में जानकारी. यानी वह पिछले करीब 36 सालों से पार्टी से जुड़े हुए हैं.

 

अब झारखंडी कांग्रेसी की बात. झारखंड के कांग्रेसी नेता प्रणव झा को ज्यादा नहीं जानते. भले ही वह झारखंड में जन्मे हैं और पढ़े लिखे हैं. वह सिर्फ नाम जानते हैं. प्रणव झा ने कभी झारखंड के कांग्रेसियों के साथ काम किया हो, ऐसी सार्वजनिक जानकारी नहीं है. इस कारण झारखंड के कांग्रेसी नेताओं के पाचन तंत्र को प्रणव झा प्रभावित कर रहे हैं.

 

अब बात झारखंड के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर की. उन्होंने 5 जून की सुबह एक पोस्ट किया. पोस्ट में लिखा कि आप सभी साथियों का सहयोग, समर्थन एवं सम्मान देने के लिए आभार, धन्यवाद व शुक्रिया. इस पोस्ट का समय सबसे महत्वपूर्ण है. अभी ना तो पार्टी में किसी पद का चुनाव है, ना कोई और कार्यक्रम. फिर राजेश ठाकुर सम्मान क्यों कर रहे हैं?

 

जाहिर है राजेश ठाकुर का पोस्ट राज्यसभा प्रत्याशी को लेकर है. एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने कहा- संभव है, वह खुद मैदान में होंगे या किसी के लिए बैटिंग कर रहे होंगे, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली. इससे उन्हें धक्का लगा है.

 

उल्लेखनीय है कि झारखंड में भले ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश हैं, लेकिन दिखते अधिक पूर्व अध्यक्ष हैं. चाहे पार्टी के बड़े नेताओं के साथ की बात तो, सीएमओ की बात हो या पार्टी के किसी कार्यक्रम की. यानी उनकी सक्रियता पहले से कहीं ज्यादा है. 

 

राज्यसभा चुनाव में क्या होगा? कांग्रेस को झामुमो का कितना समर्थन मिलेगा? यह तो आने वाला समय ही बतायेगा. भाजपा ने अभी तक झारखंड के लिए प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है. प्रणव झा को झारखंड के कांग्रेसी नेताओं का कितना समर्थन मिलेगा?

 

परिमल नाथवाणी, जिनकी खूब चर्चा हो रही है, वह भाजपा से लड़ेंगे या निर्दलीय यह भी एक बड़ा सवाल है. इन सबके जवाब अगले दो-चार दिनों में मिलेंगे.

 

 

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