- उरांव ने विधानसभा में एसीबी की कार्यप्रणाली पर उठाये थे सवाल
- एसीबी के तीन काम, फंसा दो, दबा दो या उभार दो
- ACB पर फिर उठे सवाल,
Ranchi : निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को आय से अधिक संपत्ति मामले में ACB कोर्ट से डिफॉल्ट बेल मिल गई है. एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने के कारण अदालत ने उन्हें यह राहत दी.
हालांकि, हजारीबाग जमीन घोटाले में आरोपी होने के चलते वे फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे. आईएएस विनय चौबे को डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. लोग एसीबी की जांच प्रक्रिया, उसकी गति और निष्पक्षता को लेकर खुलकर सवाल उठा रहे हैं.
सदन में उठे थे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव द्वारा कुछ साल पहले विधानसभा में दिया गया बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है. उस समय उन्होंने एसीबी की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि एजेंसी का काम करने का तरीका सवालों के घेरे में है.
विधानसभा सत्र के दौरान रामेश्वर उरांव ने कहा था कि ACB अब निष्पक्ष जांच की जगह अलग-अलग तरीके से मामलों को हैंडल कर रही है. उन्होंने टिप्पणी की थी कि “एसीबी में अब तीन तरह से काम हो रहा है, किसी को फंसा दो, किसी को दबा दो और किसी को उभार दो.
उन्होंने यह भी कहा था कि कई मामलों में बिना ठोस आधार के लोगों को फंसा दिया जाता है, जिससे वे लंबे समय तक परेशान रहते हैं. वहीं कुछ मामलों में आरोपियों को और अधिक दबाव में डाल दिया जाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों में ढील या राहत देखने को मिलती है.
पुराने अनुभव का भी किया जिक्र
रामेश्वर उरांव ने अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा था कि जब वे CID में IG के पद पर थे, तब भी इस तरह के सवाल सामने आते थे. उन्होंने संकेत दिया था कि जांच एजेंसियों को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है, वरना जनता का भरोसा कमजोर होता है.
सदन में उठाई थी जांच की मांग
सदन में उन्होंने ACB की कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग भी उठाई थी. उनका कहना था कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि एजेंसी किसी दबाव में काम न करे और हर मामले में निष्पक्षता बरती जाए.
सोशल मीडिया पर फिर गरमाया मुद्दा
अब विनय चौबे को डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स पुराने बयानों को साझा कर रहे हैं और ACB की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं. कई लोग इसे जांच में देरी और प्रक्रियागत खामियों से जोड़कर देख रहे हैं.
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि इस पूरे मामले में अब तक ACB या सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
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