Ramghar News : रामगढ़-रांची मुख्य मार्ग स्थित चुट्टूपालू घाटी में सड़क किनारे बनी दीवार को लेकर अब एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि सड़क किनारे पर्याप्त जगह छोड़े बिना निर्मित दीवार के कारण आपात स्थिति में वाहन चालकों को सुरक्षित तरीके से साइड लेने में परेशानी होती है. हाल के दो सड़क हादसों के बाद पीड़ित परिवारों की ओर से ट्रक चालकों के साथ-साथ एनएचएआई के अधिकारियों को भी प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है.
जागेश्वर बिहार के स्टेशन मास्टर की मौत के बाद उठे सवाल
04 सितंबर को चुट्टूपालू घाटी में सड़क दुर्घटना में जागेश्वर बिहार रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर किरता उरांव की मौत हो गई थी. मामले में उनकी पत्नी जयवंती तिर्की ने रामगढ़ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई. प्राथमिकी में चालक के साथ एनएचएआई के अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है.
परिजनों का आरोप है कि घाटी में सड़क किनारे एनएचएआई द्वारा बनाई गई दीवार में पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी गई है. इसके कारण आपात स्थिति में बाइक या अन्य वाहन को सुरक्षित तरीके से सड़क से किनारे करना मुश्किल हो जाता है.उनका कहना है कि यदि बाइक को समय रहते पर्याप्त साइड मिल जाती तो संभवतः हादसा टाला जा सकता था.
दूसरे हादसे में महिला की मौत, NHAI पर फिर आरोप
06 सितंबर को रांची निवासी फिरोज अंसारी अपने परिवार के साथ रामगढ़ आ रहे थे. उनके साथ पत्नी सारा तबस्सुम सहित परिवार के अन्य सदस्य कार में सवार थे. इसी दौरान घाटी में पीछे से आ रहा ट्रक तेज गति से उनकी कार के करीब पहुंच गया.
फिरोज अंसारी के अनुसार उन्होंने ट्रक से बचने के लिए कार को किनारे करने का प्रयास किया, लेकिन सड़क किनारे बनी दीवार के कारण पर्याप्त जगह नहीं मिल सकी. इसी दौरान ट्रक ने कार को पीछे से टक्कर मार दी. हादसे में उनकी पत्नी सारा तबस्सुम की मौत हो गई.इस मामले में भी ट्रक चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. साथ ही फिरोज अंसारी ने एनएचएआई के मैनेजर और संबंधित पदाधिकारियों पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है.
लगातार हादसों से बढ़ा आक्रोश
चुट्टूपालू घाटी में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बीच सड़क की डिजाइन, सुरक्षा व्यवस्था और किनारे बनी दीवार की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पीड़ित पक्षों का आरोप है कि यदि सड़क किनारे आपातकालीन स्थिति में वाहनों को सुरक्षित रूप से हटाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होगी, तो तेज रफ्तार भारी वाहनों से होने वाले हादसों का खतरा बना रहेगा.अब सवाल यह है कि क्या चुट्टूपालू घाटी में सड़क सुरक्षा मानकों के अनुरूप निर्माण हुआ है और हादसों के लिए केवल वाहन चालक ही जिम्मेदार हैं, या सड़क निर्माण से जुड़ी खामियों की भी जवाबदेही तय होगी?

