- ग्रामीणों की दो टूक—‘पैचवर्क नहीं, स्थायी सड़क चाहिए’
Ramgarh News: कुजू नया मोड़ से गिद्दी जाने वाली बहुचर्चित ‘हिरक सड़क’ की बदहाली अब गंभीर जनआंदोलन का रूप ले चुकी है. सड़क निर्माण और स्थायी समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना और चक्का जाम लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा. तेज बारिश और कड़ी धूप भी ग्रामीणों के हौसले को नहीं डिगा सकी. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जर्जर सड़क पर जान जोखिम में डालकर आवागमन करना उनकी मजबूरी बन गई है.
रविवार को मांडू की अंचलाधिकारी धरनास्थल पर पहुंचीं और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार वार्ता का कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका. सोमवार को कुजू ओपी प्रभारी आशुतोष कुमार सिंह भी धरनास्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे.
ग्रामीणों की एक ही मांग है—“कब तक इस जर्जर सड़क के कारण हम अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे? अब अस्थायी मरम्मत नहीं, कुजू नया मोड़ से गिद्दी तक स्थायी सड़क निर्माण कराया जाए.”
मांडू अंचलाधिकारी कार्यालय से रामगढ़ उपायुक्त को भेजे गए पत्र में भी सड़क की बदहाली और ग्रामीणों की समस्याओं का उल्लेख किया गया है. पत्र के अनुसार, कुजू नया मोड़ से छोटका चुंबा तक करीब 10 किलोमीटर और छोटका चुंबा से गिद्दी सी तक करीब 9 किलोमीटर सड़क अत्यंत जर्जर हो चुकी है.
32 वर्षों से नहीं हुई समुचित मरम्मत
ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण के बाद करीब 32 वर्षों से इसकी समुचित मरम्मत नहीं हुई है. यही कारण है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं और बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है.
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धरनास्थल पर डटे ग्रामीण
तीसरे दिन भी ग्रामीण धरनास्थल पर डटे रहे. बारिश और धूप के बावजूद आंदोलन जारी रहा. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर रास्ता खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक स्थायी सड़क निर्माण को लेकर ठोस आश्वासन और कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन समाप्त नहीं होगा. ग्रामीणों ने प्रशासन, सीसीएल और संबंधित विभाग के साथ-साथ रामगढ़ उपायुक्त से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है.
ग्रामीणों का सीधा सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क सिर्फ स्थानीय लोगों के आवागमन का मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है. इस पर भारी वाहनों का लगातार दबाव है. ऐसे में इसकी अनदेखी किसी बड़े हादसे को न्योता देने के समान है. ग्रामीणों ने कहा कि दुर्घटना होने के बाद मुआयना और कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले सड़क को सुरक्षित करना प्रशासन और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है.
अब सवाल यह है कि 2022 में NOC दिए जाने के बावजूद नई सड़क कब बनेगी? 19 किलोमीटर लंबे जर्जर मार्ग पर आखिर कब तक 250 मीटर पैचवर्क के भरोसे लोगों की जान जोखिम में डाली जाएगी? ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—“हिरक सड़क को सिर्फ नाम से नहीं, वास्तव में सुरक्षित सड़क बनाया जाए.” जब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं होती, ग्रामीणों ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है.
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